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नियमों को ठेंगा: सरकारी अस्पताल में खड़ी होती हैं निजी एंबुलेंस

 नारनौल :नियमों को ताक पर रखकर शहर के नागरिक अस्पताल में खुलेआम प्राइवेट एंबुलेंस खड़ी होती है। सिविल सर्जन कार्यालय के ठीक सामने खड़े होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन की इन्हें हटाने में कोई रुचि नहीं रहती। निजी एंबुलेंस चालक घायलों के परिजनों से मनमानी कीमत वसूलते हैं।

हालांकि नौ सरकारी एंबुलेंस हैं, लेकिन सरकारी अस्पताल परिसर के आपातकालीन विभाग के गेट के अंदर प्राइवेट एंबुलेंस का जमावड़ा रहता है। ऐसे में जब भी कोई हादसा होता है तो प्राइवेट एंबुलेंस चालक आपातकालीन विभाग के गेट के ठीक सामने गाड़ी लगा देते हैं। जैसे ही घायल को प्राथमिक उपचार देने के बाद रेफर किया जाता है तो ये परिजनों को जल्दी से एंबुलेंस में बैठाएं इसकी हालत गंभीर है कहते हुए एंबुलेंस में बैठा लेते हैं। इसके बाद मरीज को हायर सेंटर में उतारने पर परिजनों से मनमर्जी का पैसा वसूलते हैं। परिजनों की मनमर्जी से किराया देना मजबूरी हो जाती है।

सरकारी एंबुलेंस नहीं मिलती समय पर: जब कोई हादसे में घायल आता है तो सरकारी एंबुलेंस यहां वहां खड़ी कर दी जाती हैं जबकि आपातकालीन गेट पर प्राइवेट एंबुलेंस तीन से चार खड़ी हो जाती हैं। जब घायल के परिजन द्वार सरकारी एंबुलेंस की मांग की जाती है तो उनको झूठा बहाना बनाकर टरका दिया जाता है। घायल की हालत खराब होने के कारण वे किसी भी प्रकार का रिस्क उठाने की जरूरत नहीं समझते है और निजी एंबुलेंस को लेकर चले जाते है।