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सरकारी अस्पतालों में नहीं हो रहा गर्भवती महिलाओं का इलाज

पिनगवां :अल-आफिया सिविल अस्पताल मांडीखेड़ा में डॉक्टरों की मनमानी मरीजों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। डॉक्टरों को अपनी ड्यूटी की कोई परवाह नहीं है। मरीजों को अपने पास खड़ा करके फोन पर बातें करने मे डॉक्टर व्यस्त हो जाते हैं। जिसके कारण परेशान मरीजों को भी घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।

हालात ये हैं कि इलाज कराने आए मरीजों के साथ अभद्र व्यवहार भी किया जाता है। तंग आकर उनको प्राईवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है और इलाज के बदले मोटी रकम चुकानी पड़ती है। अस्पताल में प्रशासन नाम की कोई चीज ही नही है। जहां मरीज अपनी फरियाद सुना सकें। इसके साथ-साथ लोगों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी महीनों भर चक्कर काटने पड़ते हैं। फार्म जमा करके उनको निश्चित समय नहीं दिया जाता। जिसके कारण उन्हें अपने कार्यों को छोड़कर बार-बार आना पड़ता है या फिर तंग आकर घर बैठना पड़ता है।

गर्भवती महिलाओं को अपनी प्रसव पीड़ा के समय भी स्टाफ नर्सों के अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ता है। जिस के कारण उनकी पीड़ा और बढ़ जाती है। मोहमदा निवासी साकरस ने आरोप लगाया कि जब वह अपनी गर्भवती पत्नी मिसकीना को डिलीवरी के लिए मांडीखेड़ा के सरकारी अस्पताल में पहुंचा।

वहां उसकी पत्नी को भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन उनके इलाज की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया और दर्द ज्यादा बढ़ने पर कमरा नंबर 41 में तैनात नर्स से इलाज के लिए कहा गया। उन्होंने अस्पताल में दवाई उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर तड़पती हुई मिसकीना को तीन दिन बाद मेडिकल कॉलेज नल्हड़ के लिए रेफर कर दिया। वहां से भी उनको धक्के खाकर पुन्हाना के प्राईवेट अस्पताल मे इलाज के लिए जाना पड़ा। इस मामले में जब सीएमओ से संपर्क करने के लिए उनके पास फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।