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अधिकारियों की अनेदखी से काटे जा रहे पेड़

प्रदेश सरकार भले ही हर घर हरियाली जैसी योजनाओं पर करोड़ों खर्च कर अरावली व क्षेत्र को हरा- भरा करने का प्रयास कर रही हो, लेकिन वन विभाग के बेलगाम कर्मचारी व अधिकारियों के चलते ये योजनाएं सफल होना तो दूर वर्षों पहले लगे हुए हरे-भरे पेड़-पौधे भी वन माफियाओं द्वारा धड़ल्ले से काटे जा रहे हैं।

इससे हरियाली की बात करना बेमानी साबित हो रहा है। वहीं वन विभाग के रेंजर कुंभकर्णी नींद में सोए हुए है। प्रतिदिन हजारों क्विंटल हरे पेड़ों की लकड़ी माफिया ट्रैक्टर-ट्राली में वन विभाग के कार्यालय के सामने से ले जाते हैं, लेकिन विभाग के कर्मचारी व अधिकारी इनके खिलाफ इन पर कार्रवाई नहीं करते हैं। शहर के लोगों ने उपायुक्त व विभाग के उच्च अधिकारियों से शहर में चल रही अवैध आरा मशीनों के साथ ही विभाग के लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। गौरतलब है कि पुन्हाना वन विभाग में फैले भ्रष्टाचार के चलते क्षेत्र को हरा भरा बनाने की वन विभाग की योजनाएं सफल नहीं हो पा रही हैं। जिससे आए दिन हरे-भरे पेड़ जहां माफियाओं की भेट चढ़ रहे हैं वहीं दूसरी ओर विभाग के कर्मचारियों से लेकर अधिकारी तक की कार्यशैली के चलते अरावली की भी जमकर कोख उजाड़ी जा रही है।

समीम, चंद्र मोहन, मोहर ¨सह, संजय ¨सगला सहित लोगों का आरोप है कि प्रतिदिन सुबह से लेकर शाम तक जुरहेड़ा रोड, जमालगढ़ रोड, बड़कली रोड व राजस्थान के गांवों से भी सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्राली चालक पेड़ों को भरकर शहर में अवैध रूप से चल रहे आरा मशीनों पर ले जा रहे हैं, लेकिन विभाग के कर्मचारी व रेंजर द्वारा इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, उन्हें पर्यावरण से कोई लेना देना नहीं है। वहीं इसके साथ ही जहां जगह-जगह विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे हुए पड़े हैं वहीं दूसरी ओर पेड़ कटने के साथ ही धड़ल्ले से अवैध खनन जारी है। लेकिन विभाग में कार्यरत रेंजर व गार्ड सब कुछ जानते हुए भी जुगाड़ के आगे पूरी तरह से चुप है।

विभाग के कर्मचारी पूरी तरह से माफियाओं से मिले हुए हैं। इसके चलते कभी भी खनन व पेड़ माफियाओं सहित आरा मशीनों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है और किसी दबाव में कार्रवाई भी की जाती है तो नामात्र राशि का जुर्माना लगाकर मोटी रकम ऐंठ कर अपनी जेबे गर्म की जाती हैं।