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सरकार बांटेगी पौने दो लाख मच्छरदानी

जिले के लोगों की मच्छरों से हिफाजत करने के लिए अब सरकार मच्छरदानी बांटेगी। सरकार ने प्रदेश में पहली बार वैक्टर जनित रोगों को नियंत्रित करने के लिए यह निर्णय लिया है। इसके लिए नूंह जिले में 1 लाख 74 हजार मच्छरदानियां फ्री बांटी जाएगी। इसके लिए 142 गांवों का चयन किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि मच्छरदानियां मंगवा ली गई है और शीघ्र ही इसे लोगों के घरों तक पहुंचाया जाएगा। गत वर्षों के दौरान नूंह क्षेत्र में मलेरिया के मामले राज्य के अन्य जिलों की तुलना में अधिक पाए गए हैं। इसलिए इस वर्ष नूंह जिले के लोगों को इन बीमारियों से बचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी आधार पर केंद्र सरकार को मच्छरदानियों के लिए मांग भेजी थी।

विज ने बताया कि नूंह जिले में मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू तथा अन्य रोगों का पता लगाने के लिए रक्त की जांच के लिए 72 हजार आरडीटी किट भेजी गई हैं। इससे 15-20 मिनट में रिपोर्ट मिल जाती है। जिससे प्रभावित व्यक्ति का उपचार शीघ्र करने में सहायता मिलती है। ऐसी किट पलवल तथा यमुनानगर जिलों के प्रभावित क्षेत्रों में भी आवश्यकतानुसार भेजी गई है। नूंह जिले के सर्वाधिक जोखिम वाले 41 गांवों के तालाबों तथा उजीना ड्रेन में गमबुजिया मछलियां छोड़ी गई है, जो तालाबों के किनारे पनपने वाले मच्छरों का लारवा खा जाती है। इस वर्ष नूंह जिले में मलेरिया के मामलों में 28 प्रतिशत तक कमी आई है। जबकि पूरे प्रदेश में 38 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। प्रदेश में इस वर्ष डेंगू के मामले 15 फीसदी तक कम हुए है तथा चिकनगुनियां के मात्र 2 केस सामने आए हैं। जबकि गत वर्ष इसके 704 मामले पाए गए थे।

पलवल तथा नूंह जिले में 50 एमपीएचडब्ल्यू, 10 एमपीएचएस तथा चिकित्सकों की ड्यूटी रोटेशन में लगाई गई है। वैक्टर जनित रोगों के विषय में लोगों जागरूक करने के लिए 26 डॉक्टर, 28 आयुष चिकित्सक, 10 सीडीपीओ व सुपरवाइजर तथा 667 आशा वर्कर्स को प्रशिक्षण दिया गया है।