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छह माह में 1000 लोगों को काट गए बंदर

शहर की गलियों व पाकरे में तो सावधान रहें हीं, अपने घरों में भी बचकर रहें। न जाने कब बंदरों का झुंड हमला कर चोटिल कर दे। पॉश कालोनियों से लेकर सामान्य मोहल्लों में बंदरों के झुंड को लोगों को आतंकित करते देखा जा सकता है। हालांकि नगर परिषद बंदरों को पकड़कर शहरी सीमा से बाहर छोड़ने का दावा करता है लेकिन आंकड़े सभी दावे झुठला रहे है। नागरिक अस्पताल में पिछले छह माह में साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को रेबीज इंजेक्शन लगाया जा चुका हैं।

बंदरों का आतंक शहर में बड़ी समस्या रही है। इनके आतंक से आम व खास सभी प्रभावित रहते हैं। लोगों की परेशानी की बानगी इसी से झलकती है कि जिला न्यायाधीश भी आदेश जारी कर नगर परिषद को प्रस्ताव भेज चुकी है। आम जन तो अधिकारियों से लेकर नेताओं तक सभी जगह फरियाद लगा चुके हैं। इसके बावजूद परिषद के अधिकारियों और अध्यक्ष के कानों में जूं नहीं रेंगी।

बंदरों का प्रकोप गरीबों पर हो जाए तो बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर नागरिक अस्पताल में इंजेक्शन ही उपलब्ध नहीं होते। जिसके चलते उन्हें 500 से 700 रुपये खर्च कर इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं।