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चूक करो, जवाब दो और साफ बच निकलो, यही अफसरशाही का फंडा

चंडीगढ़। हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन से उपजे हालात का जायजा लेने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की आशंका सही साबित हो रही है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि पुलिस का राजनीतिकरण बढ़ रहा है। प्रकाश सिंह की सिफारिश के आधार पर कई अधिकारियों को सप्सेंड कर चुकी हरियाणा सरकार धीरे-धीरे उन्हें बहाल करने में लगी है। ऐसे अफसरों को न केवल बहाल किया जा रहा बल्कि बढिय़ा पोस्टिंग भी मिल रही है।

राज्य सरकार ने निलंबित आठ डीएसपी को बहाल कर हाल ही में अच्छी पोस्टिंग दी है, जबकि तीन एसडीएम पहले ही बहाल किए जा चुके हैं। बाकी बचे आधा दर्जन अधिकारियों को भी मुख्य धारा में लाने की तैयारी है। राज्य में अफसरों की कमी निलंबित अधिकारियों की  बहाली का आधार बनती जा रही है। पिछले साल फरवरी में हुए जाट आरक्षण आंदोलन की जांच के लिए उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई थी।

प्रकाश कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में करीब एक दर्जन आइएएस और आइपीएस अधिकारियों के साथ 90 पुलिस अफसरों की भूमिका को संदिग्ध माना था। सरकार को जाट आरक्षण आंदोलन में राजनीतिक साजिश की भी आशंका थी। लिहाजा जस्टिस एसएन झा के नेतृत्व में एक आयोग बनाया गया, जिसका कार्यकाल तीन बार बढ़ाया जा चुका है, मगर अभी तक उसकी रिपोर्ट नहीं आई है।

प्रकाश सिंह की रिपोर्ट को शुरू में गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की गई, लेकिन विभिन्न मुद्दों पर प्रकाश सिंह और सरकार के बीच टकराव बढ़ते जाने के बाद निलंबित अफसरों को बहाल किया जाने लगा।  सरकार ने आइएएस और आइपीएस अधिकारियों के साथ-साथ एचपीएस व एचसीएस अधिकारियों से उनका पक्ष जाना तो सभी ने प्रकाश सिंह की रिपोर्ट को दुर्भावना से प्रेरित बताया।