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चाइल्ड हेल्पलाइन पर तीन महीने में आई 100 शिकायतें, बीते दो साल में 650

बच्चों के साथ प्रताड़ना व शोषण का मामला नया नहीं है। स्कूल हो या घर बच्चों के साथ प्रताड़ना व शोषण होता है। ज्यादातर मामलों में अभिभावक समाज में इज्जत के नाम पर मामले को दबा देते हैं। जिले में वैसे प्रदेश में सबसे पहले साल 2006 में चाइल्ड हेल्पलाइन शुरू कर दी गई थी लेकिन यह 2015 में वर्किंग में आई। हेल्पलाइन पर पिछले दो सालों में लगभग 650 शिकायतें आ चुकी हैं, जिनमें बच्चों के साथ स्कूल में एसएलसी के नाम पर, फीस के नाम पर प्रताड़ित करने, घर में खुद के रिश्तेदार द्वारा बच्चे का शारीरिक शोषण के मामले भी शामिल हैं। इनमें से 100 शिकायतें पिछले तीन महीने में आई हैं।

गुरुग्राम व पानीपत में हुई घटना के बाद अभिभावकों को अपने बच्चों की सुरक्षा की ¨चता होना स्वभाविक है। सुरक्षा इसलिए भी चर्चा का विषय है, क्योंकि इन दोनों ही घटनाओं को अंजाम देने वाले कोई बाहरी नहीं, बल्कि स्कूल में कार्यरत स्टाफ के व्यक्ति थे। बच्चों के साथ शोषण व प्रताड़ना स्कूल के साथ-साथ घर में भी हो सकती है, जिसमें अपने भी शामिल हो सकते हैं।

अकसर होने वाली घटनाओं में बच्चों का शोषण करने वाले अपने ही मिलते हैं, चाहे वह चाचा हो, पापा का दोस्त हो या परिचित। ये घटनाएं उन परिवारों में ज्यादा होती हैं, जहां मां-बाप दोनों जॉब या व्यवसाय के सिलसिले में घर से बाहर रहते हैं और बच्चे घर में अकेले रहते हैं। 18 साल तक के बच्चों की सुरक्षा व उनके अधिकारों के लिए सरकार द्वारा हेल्पलाइन नंबर शुरू किया गया है, जिसका नंबर 1098 है। इसमें प्रताड़ना, शारीरिक व मानसिक शोषण से संबंधित मामलों की शिकायत की जा सकती है