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मेडिकल स्टोर पर भी मिल सकेगी स्वाइन फ्लू की दवाई

अब मेडिकल स्टोर की दुकान पर भी स्वाइन फ्लू की दवाएं आसानी से मरीजों के परिजनों मिल सकेगी। क्योंकि, इसको रखने के लिए लिए जाने वाले लाइसेंस की बाध्यता मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए खत्म कर दी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्वाइन फ्लू की दवाओं जैसे ओसाल्टामिविर और जेनामिविर को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमावली-1945 के तहत शेड्यूल एक्स से हटाकर शेड्यूल-एच-1 में शामिल कर दिया है। यह जानकारी प्रदेश के ड्रग कंट्रोल आफिसर नरेंद्र कुमार आहूजा ने अंबाला छावनी के फीनिक्स क्लब में अंबाला होल सैलर्स केमिस्ट एसोसिएशन के कार्यक्रम में दी गई। कार्यक्रम में अंबाला के अलावा पंचकूला, कुरुक्षेत्र और करनाल समेत अन्य जिलों से आए जिला ड्रग कंट्रोल आफिसर भी मौजूद थे।

इतना ही नहीं, होलसेल और फुटकर दवा विक्रेताओं को शेड्यूल एक्स की तरह ही अब होम्योपैथिक दवाइयों को बेचने के लिए भी लाइसेंस की जरूरत नहीं है। दोनों ही लाइसेंस की बाध्यता खत्म होने से दवा विक्रेताओं के साथ-साथ मरीजों को काफी राहत मिली है। क्योंकि पहले स्वाइन फ्लू की दवा शेड्यूल एक्स में होने से इसके लिए अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत होती थी। लेकिन अब इसे एच-1 में शामिल करने के साथ-साथ दवा विक्रेता अपने 20बी और 21बी लाइसेंस के अंतर्गत आसानी से बेच सकेंगे। इसका फायदा उन मरीजों को होगा जिन्हें स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं और टेमीफ्लू के साथ-साथ ओसाल्टामिविर और जेनामिविर जैसी दवाइयों के लिए प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते थे। इसके अलावा प्राइवेट अस्पताल स्वाइन फ्लू के इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे। इससे मरीजों के परिजनों को राहत जरूर मिलेगी और इलाज कराने का विकल्प रहेगा।

हर दवा विक्रेता के पास मिलेगी दवाई

केंद्रीय एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शेड्यूल एक्स और होम्योपैथिक की दवाइयों की लाइसेंस की बाध्यता खत्म की है। इससे मरीजों को दवाइयों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। डॉक्टर की पर्ची के बाद ही दवा विक्रेता यह दवाई देंगे। इस पर कड़ी नजर भी रखी जाएगी। वैक्सीन को सही तापमान पर रखने की हिदायतें मेडिकल शॉप संचालकों को दी गई है ताकि वैक्सीन पूर्ण तरीके से मरीज पर प्रभावी काम कर सके।

नरेंद्र कुमार आहूजा, ड्रग कंट्रोलर, हरियाणा