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भविष्य को बचाने के लिए अपनाएं अक्षय उर्जा : पार्थ

अतिरिक्त उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने कहा कि भविष्य को बचाने के लिए अक्षय उर्जा को अपनाना होगा। इसके लिए सभी स्कूलों और संस्थाओं को अपने-अपने संस्थानों में सौर उर्जा के प्लांट स्थापित करने होंगे। इतना ही नहीं अक्षय उर्जा के प्लांट लगाकर 90 फीसदी बिजली की बचत की जा सकती हैं।

वह वीरवार को देर सायं लघु सचिवालय के सभागार में स्कूलों के ¨प्रसिपलों और संचालकों की एक बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि पावर, शक्ति और उर्जा के इर्द-गिर्द ही आज पूरी दुनिया घूम रही हैं। इस आधुनिक युग में पूरी दुनिया का व्यापार भी उर्जा से चल रहा हैं। इस बिजली के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती हैं। इन तमाम पहलुओं के बावजूद प्रत्येक व्यक्ति उर्जा का जरूरत से ज्यादा दोहन कर रहा है और कोई भी व्यक्ति उर्जा को बचाने का प्रयास भी नहीं कर रहा है। इसी तरह आíथक विकास की इस अंधाधुंध दौड़ ने देश की भावी पीढ़ी को बहुत भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि आज सबको अपने नैतिक और सामाजिक दायित्व को निभाते हुए बिजली को बचाने के लिए सौर उर्जा की तरफ अपना रुख करना होगा। इसके लिए सरकार लोगों को जागरुक करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन सरकार का संदेश देश की भावी पीढ़ी बच्चों तक पहुंचाने का काम शिक्षक और प्राचार्या ही बखूबी कर सकते हैं। सभी शिक्षण संस्थान अपने-अपने संस्थानों में सौर उर्जा प्लांट स्थापित करे। इससे बिजली की 90 फीसदी बचत की जा सकती है। अक्षय उर्जा के परियोजना अधिकारी बलवान गोलन ने राज्य सरकार की अक्षय उर्जा से संबंधित नेट मि¨ट्रग पावर पालिसी सहित तमाम योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य सरकार के आदेशानुसार सभी स्कूलों और संस्थाओं को सौर उर्जा प्लांट जरुर स्थापित करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 तक 1 लाख मेगावॉट के लक्ष्य को हासिल करना हैं। इस प्लांट के स्थापित करने से बिजली की समस्या से बचा जा सकता है और बिजली की बचत भी की जा सकती हैं। इस योजना की तरफ धीरे-धीरे स्कूलों और संस्थाओं का रुझान बढ़ रहा हैं, जो स्कूल और संस्था शीघ्र ही सौर उर्जा के प्लांट नहीं लगाएगी उनका बिजली का कनेक्शन काटा जा सकता है। इस कार्यक्रम के अंत में डिप्टी डीईओ नमिता कौशिक ने आंगतुकों का आभार व्यक्त किया