News Description
विदा होते भादो ने बुझाई सावन की प्यास

विदा होते होते भादो माह ने सावन माह में कम हुई बारिश की प्यास बुझा दी। भाद्रपद के अंतिम सप्ताह में ही करीब 50 से 60 एमएम तक बारिश हुई है। बुधवार की रात भी जिले में झमाझम बारिश हुई। बृहस्पतिवार को सुबह जब किसानों की आंख खुली तो बारिश हो रही थी और खेतों में पानी खड़ा हुआ था। अच्छी बारिश से किसानों की बांछें खिल गई।

 जिले में खरीफ सीजन में किसानों ने धान, गन्ना, कपास, ज्वार, मक्का, अरहर, तिल व सब्जियों की फसलें भी उगाई हुई हैं। सबसे ज्यादा पानी की जरूरत धान फसल को होती है। धान की खेती भी किसान सबसे ज्यादा करते हैं। धान और गन्ना जैसी फसलों को ¨सचाई के लिए किसान काफी परेशान थे। रजवाहों में पानी न आने और बिजली की कम आपूर्ति के चलते फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई थी। सबसे ज्यादा हथीन जैसे अ¨सचित क्षेत्रों में किसान बेहद दुखी थे। कुछ किसान महंगा डीजल खर्च करके अपनी फसलों को बचाने में जुटे थे।

इस बार पूरे मानसून सीजन में सावन में गिनी-चुनी ही बारिश हुई थी। उनमें में एक-दो ही काम चलाऊ बारिश हुई थी, लेकिन भादो शुरू होते ही 31 अगस्त को करीब 24 एमएम बारिश हुई थी। अब बुधवार की रात्रि फिर जोरदार बारिश हुई। बारिश से जो खेत खाली थे, उनमें पानी ही पानी नजर आने लगा था। किसानों की मानें तो हुई बारिश से न केवल खरीफ बल्कि रबी फसल की बुआई में भी लाभ मिलेगा, क्योंकि कुछ समय बाद सरसों व चना की बुआई की जानी है। खेतों में नमी रहने से दोनों फसलों को लाभ मिलेगा।