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नेहरू काॅलेज के 12 प्रोफेसर कक्षाएं छोड़ दिल्ली प्रदर्शन में पहुंचे, पढ़ाई बाधित

झज्जर के सबसे पुराने राजकीय नेहरु काॅलेज के 29 में से 12 प्रोफेसर काॅलेज में बच्चों की कक्षाएं छोड़ सातवें वेतन आयोग के तहत यूजीसी वेतनमान लागू कराने के लिए दिल्ली पहुंचे और जंतर मंतर पर धरना दिया। इस दौरान कई अन्य प्रदेशों से भी शिक्षक वर्ग आया। सभी ने जेल भरो आंदोलन के तहत संसद मार्ग थाने में सामूहिक गिरफ्तारी दी। जिन्हें कुछ समय बाद छोड़ दिया गया। इस बीच शहर के नेहरु काॅलेज में पढ़ने वाले करीब ढाई हजार बच्चे काॅलेज में आधे शिक्षक होने के कारण कक्षाओं में खाली बैठे रहे। जबकि कुछ बच्चों को अन्य कक्षाओं में शिफ्ट करना पड़ा। 


अखिल भारतीय विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय शिक्षक संगठन के आह्वान पर देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों के शिक्षकों ने इस आंदोलन में भाग लिया। प्राध्यापकों की मांगों का रोहतक के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी समर्थन किया। नेहरु कॉलेज से हरियाणा राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ के प्रधान धनपत सिंह, सचिव डॉ. अमित भारद्वाज सहित वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. डीपी शर्मा, डॉ. एसजेडएच नकवी, डॉ. जसबीर कौर, डाॅ. रवि किरण मदान, डॉ. जगदीश राहड़, डॉ. प्रताप फलसवाल, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. अजय कुमार, सुरीला तथा संजीव कुमार ने प्रदर्शन में भाग लिया। 

दोसाल से लड़ रहे हैं लड़ाई 

नेहरुकाॅलेज के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डाॅ. अमित भाद्वाज ने बताया कि केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के शिक्षकों के लिए सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट जारी नहीं की है, जबकि अन्य जितने भी गैर शिक्षक कर्मचारी हैं उन्हें ये पे मिल चुका है। लिहाजा दो साल से प्रोफेसर वर्ग अपनी लड़ाई लड़ रहा है। इसी साल जुलाई और अगस्त में नेहरु काॅलेज के प्रोफेसर दिल्ली में प्रदर्शन कर चुके हैं, जबकि 20 दिन पहले काॅलेज में धरना दिया था। 

ये हैं महाविद्यालय के शिक्षकों की मुख्य मांगें 

महाविद्यालयशिक्षकों की प्रमुख मांगों में सातवें वेतन आयोग के तहत यूजीसी वेतनमान लागू करना, प्रमोशन के लिए एपीआई को पूरी तरह समाप्त करना, नई पेंशन व्यवस्था को समाप्त करके पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करना, छठे वेतन आयोग की विसंगतिया दूर करना, शिक्षा के फंड में अनावश्यक कटौती पर रोक लगाना और जीडीपी का न्यूनतम छह प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करना, शिक्षकों के सभी खाली पदों पर शीघ्र स्थाई नियुक्ति करना, अस्थाई शिक्षकों के वेतनमान तथा सेवा शर्तें निर्धारित करना, हिपा, हीरा जैसी संस्थाओं के गठन का प्रस्ताव वापस लेना और यूजीसी तथा एआईसीटीई को सुदृढ़ करना है