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स्वाइन फ्लू के आगे बेबस नजर आ रहा स्वास्थ्य विभाग

स्वाइन फ्लू के कहर के आगे स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम धराशायी हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग एच1एन1 वायरस के आगे बिल्कुल बेबस नजर आ रहा है। अब तक छह लोगों को एच1एन1 होने की पुष्टि हुई है, जिनमें से चार की मौत हो चुकी है। गर्मी के मौसम में इसका प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि समय पर टैमी फ्लू देने के बाद भी कुछ मरीजों की जान बचाई नहीं जा सकी।

जिले में मचा रहा मौत का तांडव

स्वाइन फ्लू का वायरस जिले में तांडव मचा रहा है। जिले में सबसे पहला मामला इस्माईलाबाद में सामने आया था, जहां 60 वर्षीय अंजू बाला इसकी चपेट में आ गई थी। चंडीगढ़ पीजीआइ में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद पिपली आदर्श नगर निवासी 53 वर्षीय संतोष देवी ने अग्रवाल नर्सिंग होम में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। संतोष देवी को भी स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद रोहतक में दाखिल हथीरा निवासी 39 वर्षीय महेंद्र ¨सह की मौत हो गई थी। इसके बाद चौथा मामला लाडवा में सामने आया था और मंगलवार को लाडवा निवासी विजय गुप्ता उर्फ कुक्कू की मौत हो गई।

नाममात्र का आइसोलेशन वार्ड

एलएनजेपी अस्पताल में कहने को स्वाइन फ्लू का आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है। स्थिति के मद्देनजर यह आइसोलेशन वार्ड बड़े छोटे हैं। दो प्राइवेट कमरों को आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। एकदम से स्वाइन फ्लू के मरीज आने की स्थिति में स्थिति बिगड़ सकती है।

टैमी फ्लू का भी अभाव

स्वास्थ्य विभाग के पास मरीजों को देने के लिए टैमी फ्लू गोलियां भरपूर मात्रा में हैं, लेकिन बच्चों को दी जाने वाली टैमी फ्लू दवाई स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है जबकि प्रदेश में बच्चों को भी स्वाइन फ्लू अपनी चपेट में ले रहा है। ऐसे में अगर किसी बच्चे को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई तो स्वास्थ्य विभाग को फिर दूसरे जिलों की ओर मुंह ताकना पड़ेगा।

सर्दियों में नहीं मिला था एक भी मरीज

स्वाइन फ्लू का वायरस सर्दियों में सक्रिय हो जाता है। खासकर तब जब तापमान 10 डिग्री से भी नीचे हो। तब यह वायरस लोगों को अपनी चपेट में लेता था। जनवरी फरवरी में इसके सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। मगर इस वर्ष सर्दियों में एक भी स्वाइन फ्लू का मामला सामने नहीं आया था, जिससे स्वास्थ्य विभाग राहत की सांस ले रहा था। मगर गर्मियों में 25 दिनों में तीन की मौत समेत पांच लोगों को अपनी चपेट में लेकर इस वायरस ने स्वास्थ्य विभाग के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।