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पवित्रता को बरकरार रखने के लिए प्रशासन उठाए ठोस कदम

प्रदेश सरकार की ओर से कुरुक्षेत्र को धार्मिक शहर का दर्जा दिया गया है। धार्मिक मान्यता मिलने से धर्मनगरी में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ ही शहर का सुंदरीकरण होगा। धार्मिक शहर की पवित्रता को बरकरार रखने के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाए, तभी यह घोषणा सार्थक होगी। कुरुक्षेत्र व पिहोवा कहने को तो पहले से ही धर्मनगरी थी, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते कभी इनको धर्मनगरी का दर्जा नहीं मिल पाया था। धार्मिक शहर का दर्जा मिलने पर धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं ने स्वागत किया है।

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चोरी छिपे होटलों में बिकता था नानवेज

धर्मनगरी में शराब व मांस बेचने पर प्रशासन की तरफ पाबंदी लगाने का दावा किया जा रहा था, इसके बावजूद भी होटलों में चोरी-छिपे मांस व शराब परोसी जाती थी। कई होटल संचालकों की ओर से बाकायदा मेन्यू भी जारी किया गया था। अब सरकार की ओर से धर्मनगरी को धार्मिक नगरी घोषित किया गया है। इससे शराब व मांस की परोसने का कारोबार बंद होगा।

पंडित सतबीर शास्त्री, अध्यक्ष शिव शक्ति ज्योतिष केंद्र

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सरकार का फैसला सराहनीय

कुरुक्षेत्र गीता व महाभारत की पवित्र भूमि है। राजा कुरु ने यहां तपस्या की थी। महाभारत व उससे प्राचीन ग्रंथों में धर्मनगरी का वर्णन है। सरकार की ओर से जो फैसला लिया गया है, वह सराहनीय है। इससे धर्मनगरी पर्यटन की दृष्टि से विकसित होगा। कई बार नगर परिषद की ओर से मांस व शराब बिक्री पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया, लेकिन सफल नहीं हो पाई। अब सरकार की घोषणा सही तरीके से लागू होगी।

आचार्य राजेश वत्स, अध्यक्ष, श्री गुरु धाम संस्कृत वेद विद्या पीठम अनुसंधान ट्रस्ट

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पर्यटकों की बढ़ेगी संख्या

ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा की ओर से कई बार इस बारे में प्रशासन को अवगत कराया गया है कि धर्मनगरी में शराब व मांस बिक्री पर रोक लगाई जाए। अयोध्या, मथुरा व हरिद्वार व वाराणसी को यह दर्जा मिला है, इसके बाद धर्मनगरी का स्थान है। जाहिर है कि अब धर्मनगरी में पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी और तीर्थो के किनारे शराब का सेवन करने वाले असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगेगा