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कल तक डेरे से जुड़े अनुयायी जिन फोटो को पूजते थे, अब उन्हें कबाड़ में बेच रहे

डेरा सच्चासौदा प्रमुख को साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा होने के बाद अब डेरे से जुड़े अनुयायियों की आस्था भी दरकने लगी है। जिस डेरे से जुड़े साहित्य डेरा मुखी की फोटो आदि की अगाध श्रद्धा के साथ पूजा करते थे उस साहित्य को संभालकर रखते थे। वहीं उक्त साहित्य फोटो कबाड़ में पहुंचने लगा है। हालात ऐसे हैं कि विगत दो दिन में कबाड़ की दुकानों पर उक्त साहित्य की बोरियां कट्टे भर पहुंच रही हैं। वहीं डेरे से जुटे लॉकेट भी अब सड़कों पर पड़े नजर आने लगे हैं।

रोजाना कबाड़ में रहा डेरे का साहित्य : सलारपुर रोड स्थित कबाड़ का काम करने वाले दुकानदार राकेश कुमार ने बताया कि उसके पास दो दिन में रोजाना एक बोरी के करीब रद्दी में डेरे से जुड़ा साहित्य पहुंच रहा है। इसमें अधिकतर साहित्य पर डेरा मुखी गुरमीत की फोटो छपी हैं। इसके अलावा डेरा मुखी की फोटो आदि भी काफी संख्या में कबाड़ में शहर गांव से रही है। जबकि उसे कबाड़ का काम करते दस साल हो चुके हैं, इससे पहले कभी डेरा संबंधी एक किताब भी उसके पास नहीं आई।

कबाड़ का काम करने वाले बादल सिंह ने कहा उसकी दुकान पर भी रद्दी में काफी साहित्य डेरा सच्चा सौदा से संबंधी कबाड़ में आया है। 
बोलनेलगे लोग, आस्था के नाम पर शोषण शर्मनाक: वहींडेरा मुखी के अच्छे रसूख के आगे कलतक कोई बोलने को तैयार नहीं था, वहीं अब लोग भी खुलकर प्रतिक्रया देने लगे हैं। नरेंद्र मोदी विचार मंच के जिला प्रभारी डॉ. वीके गुप्ता कहते हैं कि आस्था के नाम पर ऐसा खिलवाड़ करने वालों को इससे भी कड़ी सजा होनी चाहिए। वहीं लोक स्वराज ट्रस्ट के प्रधान रघुबीर गर्ग ने कहा ऐसा दुष्कृत्य करने वालों को फांसी से कम सजा नहीं होनी चाहिए, ताकि आगे से कोई खुद को इतना शक्तिशाली दिखा भोली-भाली जनता विशेषतौर पर महिलाओं के साथ ऐसा खिलवाड़ कर सके।

जिले से भी कई लड़कियां पिछले कई सालों से बतौर साध्वी डेरे में रह रही थीं। ऐसी ही कई साध्वियां अब घरों को लौट चुकी हैं। बीड कालवा सूरजगढ़ की तीन लड़कियां पिछले दस साल से साध्वी बनी थी। बताया जाता है कि ये साध्वियां कभी कभार ही अपने घर आती थीं। परिजनों ने भी श्रद्धा के चलते इन्हें डेरे में साध्वी बनने की मंजूरी दी थी। हालांकि लौटने के बाद उक्त साध्वियां चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसे ही एक साध्वी से बातचीत करनी चाही, लेकिन उसने परिवार ने डेरा मुखी के मामले में कुछ भी कहने से साफ इंकार कर दिया।

इंसा के गले की शान लॉकेट अब दिख रहा सड़कों पर
गुरमीतसिंह अपने अनुयायियों को गले में डालने के लिए एक नंबर लॉकेट देता था। जिसे पहनना हर डेरा प्रेमी अपनी शान समझता था, लेकिन डेरामुखी को सजा मिलने के बाद लोग भी उसके डेरे से दूर होने लगे हैं। कल तक जिस लॉकेट को श्रद्धा से पहनते थे, वही अब सड़कों पर बिखरा नजर रहा है। कई भक्तों ने खुद ही गले से लॉकेट उतार कर फेंक दिए। वहीं कई भक्त डेरा से जुड़े साहित्य डेरा मुखी की फोटो नहर मारकंडा नदी में भी बहाने पहुंचे। बता दें कि हर डेरा प्रेमी के घर पर गुरमीत सिंह की फोटो लगी