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जो असफलता के बाद भी धैर्य और संतुलन नहीं खोते वही होते हैं सफल’

उतार-चढ़ावउस दिमागी खेल की भांति है, जिसमें कभी हार होती है तो कभी जीत। यदि हम खेल को कुशलता ध्यान पूर्वक खेलते हैं तो विजय मिलती है और ध्यान चूकने पर पराजय का सामना करना पड़ता है। यह बात आचार्य पवन शर्मा ने माता वैष्णवी धाम में आयोजित मां वैष्णवी के सत्संग मासिक भंडारे के दौरान श्रद्धालुओं को कही। 

आचार्य ने कहा कि जीवन में आने वाली तकलीफों को जीवन में एक अनिवार्य अंग मानकर जिया जाए तो जीवन बेहद खूबसूरत बन सकता है। जल की भांति समय भी सदैव बहता रहता है। जल प्रवाह में जब कोई बाधा आती है तो एक पल को जल रूक जाता है। लेकिन तभी तेज धारा से वह बाधा अपने-आप हट जाती है और जल अपने मार्ग पर चल पड़ता है। इसी तरह हर व्यक्ति के जीवन में भी उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन जीवन में बड़ी सफलताएं उन्हीं को प्राप्त होती हैं जो बड़ी से बड़ी असफलता में भी अपना धैर्य और संतुलन नहीं खोते। इस मौके पर सुरेंद्र सिंगला, श्यामलाल छाबड़ा, सोमनाथ लखीना, आरपी ग्रोवर, रघुनंदन शर्मा, हरबंस मंगला, अशोक गुलाटी, दिनेश गुप्ता, गिरधारी आहूजा, पूर्ण गिरधर मौजूद रहे