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राम-रहीम प्रकरण: डेरा प्रमुख को सजा के साथ अंबाला से टले तीन खतरे

 पंचकूलावासियों में 25 अगस्त के दिन की दहशत आज भी बरकरार है। इस दिन डेरा प्रेमियों ने यहां पर जमकर उपद्रव मचाया और सरकारी भवनों सहित कई वाहनों में आग तक लगा दी। ¨हसा में करीब 28 लोगों की जान भी चली गई थी। यह दंगे पंचकूला की जगह अंबाला में भी हो सकते थे। क्योंकि साध्वियों से दुष्कर्म के मामले की नींव अंबाला सीबीआइ कोर्ट में ही रखी गई थी। अंबाला सीबीआइ कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम कोर्ट में पेश भी हुए और बाद में यह पेशी वीडियो कान्फ्रें¨सग से शुरू कर दी गई। अभी मामले का निपटारा भी नहीं हुआ था कि सीबीआइ कोर्ट को अंबाला से पंचकूला में शिफ्ट कर दिया गया जहां डेराप्रमुख को दोषी करार दे दिया गया। यदि अंबाला में ही सीबीआइ कोर्ट रहती तो पंचकूला की जगह अंबाला भी जल सकता था।

बता दें कि वर्ष 2002 में जब यह मामला प्रकाश में आया था उस समय अंबाला में ही सीबीआइ की विशेष कोर्ट थी। प्रदेश संबंधित सीबीआइ से जुड़े मामले इसी कोर्ट में आते में ही आते थे। डेरा प्रमुख सहित कई चर्चित मामले अंबाला की ही सीबीआइ कोर्ट में चल रहे थे। डेरा प्रमुख की पेशी के दौरान अंबाला की सड़कों पर भक्तों का तांता लग जाता था। उस दौरान भी पुलिस को कड़ी चुनौतियां झेलनी पड़ती थीं। दोषी करार देने के बाद डेरा प्रमुख को अंबाला सेंट्रल जेल में ही लाए जाने की तैयारी थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से डेरा मुखी को अंबाला की सेंट्रल जेल में नहीं लाया गया। अंबाला की सेंट्रल जेल में डेरामुखी को इसीलिए नहीं लाया गया क्योंकि सेंट्रल जेल आबादी वाले एरिया के नजदीक ही स्थित है। जबकि सुनारिया जेल आबादी वाले एरिया से करीब 10 किलोमीटर दूर है। इस तरह दूसरा खतरा भी अंबाला से टल गया। इसी प्रकार जो सजा का ऐलान जो सोमवार को रोहतक में हुआ है वह अंबाला में होता। ऐसे में सोमवार को अंबाला में स्थिति बेहद तनावपूर्ण रहती। इस तरह डेरा प्रमुख को सजा के साथ-साथ सोमवार को तीनों खतरे टल गए