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लावारिस गोवंश को सड़कों से हटाने की योजना फ्लॉप

सरकार की ओर से प्रशासन को जिले की सड़कों से लावारिस पशुओं को हटाने के लिए 15 अगस्त निर्धारित की थी, लेकिन निर्धारित समयावधि में प्रशासन पशुओं को शिफ्ट करने में पूरी तरह फ्लॉप रहा। अल्टीमेटम खत्म हो चुका है, अभी भी शहर की सड़कों पर लावारिस पशुओं का जमावड़ा है। हालांकि नगर परिषद की ओर से दावा किया जा रहा है कि कुछ पशु ही शिफ्ट करने शेष रह गए हैं।

नप की ओर से प्रशासन को दो बार झूठी रिपोर्ट भी पेश की जा चुकी है। 10 अगस्त को हुई बैठक में नगर परिषद की ओर से पेश की रिपोर्ट में दावा किया गया कि 70 से 74 लावारिस पशु ही बचे हैं, जिन्हें 15 अगस्त तक हटा लिया जाएगा। लिहाजा 15 अगस्त तक 100 से ज्यादा पशुओं मथाना गोशाला में शिफ्ट किय जा चुका है। अहम पहलू यह भी है कि पहले नप की ओर से सफाई कर्मियों को पशु पकड़ने की जिम्मेवारी सौंपी गई। पशुओं को पकड़ने के दौरान सफाई कर्मी कई बार चोटिल हुए, जिसके बाद सफाई कर्मियों ने पशु पकड़ने से हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद नप ने आनन-फानन में 1000 रुपये प्रति पशु पकड़ने का ठेका दिया। अब तक ठेकेदार की ओर से 100 से ज्यादा लावारिस पशुओं को मथाना गोशाला में शिफ्ट किया जा चुका है।

बता दें कि 4 अगस्त को मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. राकेश गुप्ता ने वीडियो कांफ्रे¨सग के जरिये अधिकारियों ने 15 अगस्त तक जिले की सड़कों से बेसहारा पशुओं से मुक्त कराने का अल्टीमेटम दिया था। मगर इसे अमलीजामा पहनाने के लिए प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।

प्रशासन की उदासीनता के चलते हर बार पशुओं को शिफ्ट करने की योजना फ्लाप हो गई। हालांकि सरकार की ओर से पहले 31 जुलाई तक जिले को बेसहारा गोवंश से मुक्त करने के निर्देश दिए थे। मगर निर्धारित समयावधि तक प्रशासन इसे पूरा नहीं कर पाया था। अतिरिक्त प्रधान सचिव ने वीडियो कांफ्रे¨सग के जरिये अधिकारियों को फटकार लगाते हुए हिदायत दी थी कि 15 अगस्त तक जिले की सड़कों को मुक्त कराने में कोई कोताही न बरती जाए। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी बीएन भारती का कहना है कि मथाना गोशाला में पशुओं को शिफ्ट किया जा रहा है। ठेकेदार के साथ सफाई कर्मी भी बेसहारा पशुओं को पकड़ रहे हैं।

यह है गोशालाओं की स्थिति

जिले में करीब 20 गोशालाएं हैं। इनमें से करीब आठ पंजीकृत है। ज्यादातर गोशालाओं में 100 से 150 गायों को रखने की ही जगह है। लिहाजा इसके चलते गोशाला संचालक भी बेसहारा गायों को पनाह देने से हाथ पीछे खींच रहे हैं।

झूठी रिपोर्ट को किया उजागर

31 जुलाई के बाद नगर परिषद थानेसर ने जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी थी कि सड़क सिर्फ 250 पशु ही लावारिस घूम रहे हैं, जिसमें से 200 नंदी तथा बाकी गाय हैं। इसके बाद 10 अगस्त को रिपोर्ट में केवल 75 गोवंश को ही सड़कों पर दिखाया गया। नप की इस रिपोर्ट की पोल शहर की सड़कों पर जगह-जगह झुंड में घूम रहे गोवंश खोल रहे हैं। 1500 से भी ज्यादा बेसहारा पशु सड़कों पर हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगर परिषद व नगर पालिकाएं केवल कागजों में ही बेसहारा पशुओं से जिले को मुक्त कराने की योजना को अमलीजामा पहनाने में जुटी हैं। जिले भर में 2900 बेसहारा गोवंश थे, जिनमें से 650 गोवंश को मथाना गोशाला में शिफ्ट किया जा चुका है।