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लावारिस बैगों की भी नहीं हुई रेलवे स्टेशन पर चे¨कग

मंडल रेलवे स्टेशन पर स्वतंत्रता दिवस के दौरान जो चाक-चौबंद सुरक्षा प्रबंध दिख रहे थे वह 48 घंटों में ही हवा हो गए। स्टेशन के प्रवेश द्वार पर न कोई निगरानी थी और न ही आरपीएफ सहायता बूथ पर ही कोई मुलाजिम नजर आया। विशेषकर टिकट घर के साथ से एक वक्त में स्टेशन में दर्जनों लोग प्रवेश कर रहे थे लेकिन यहां कोई मुलाजिम नहीं था जो इन पर निगाह रखता। अलबत्ता पूरे स्टेशन महज पांच मुलाजिमों के भरोसे दिख रहा था। इसमें से जीआरपीएफ के दो जवान स्टेशन के बाहर परिसर में खड़े दिखे तो दो मुख्य द्वार की दिशा में थे। इसके अलावा एक आरपीएफ का जवान नजर आया। जबकि स्टेशन से हर मिनट दर्जनों लोग आवाजाही कर रहे थे।

रेलवे स्टेशन के मुख्यद्वार पर एक ट्राली बैग एक व्यक्ति लावारिस छोड़ दूसरी तरफ खड़ा हो गया। चूंकि, यह सब दैनिक जागरण संवाददाता के सामने ही हो रहा था तो इस पूरे मामले को कैमरे में कैद होता देख गेट पर सुस्त सा खड़ा मुलाजिम हरकत में आया और संबंधित बैग के बारे में पूछताछ की। हालांकि, अगले ही पल में व्यक्ति के सामने आ जाने से मुलाजिम ने सांस में सांस ली। इसके बावजूद उसने अपने साथी को भी गेट की तरफ बुला लिया। इसके बावजूद यहां से गुजरने वालों की कोई जांच पड़ताल नहीं की जा रही थी। इसी प्रकार टिकट घर के बाहर मुलाजिम यहां से गुजरने वालों के सामान पर निगाह रखने के बजाय बतियाते नजर आए। वहीं, मेटल डिटेक्टर खिलौना बना हुआ था।

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कालोनी की तरफ भी नहीं कोई चेक प्वाइंट

स्टेशन पर ट्रेन आते ही मुसाफिर पुल से प्लेटफार्म तक जाने के बजाय सरेआम पटरियां पार करते रहे। विडंबना यह थी कि यहां प्लेटफार्मों पर ही दर्जन भर टीटीई घूम रहे थे। आरपीएफ पोस्ट भी स्टेशन पर ही है लेकिन ऐसे लोगों को कोई सबक सिखाने को आगे नहीं आया। छावनी रेलवे स्टेशन की सुरक्षा में एक छेद रेलवे कालोनी की तरफ से आने वाले रास्ते से भी है। ऐसे में मंडल रेलवे स्टेशन पर कोई कहीं से भी आवाजाही कर सकता है और ऐसी व्यवस्था ही नहीं है जिससे कि कि स्टेशन पर आवाजाही एक ही जगह से सुनिश्चित हो सके।