News Description
स्वास्थ्य विभाग के अधिकािरयों को आदेश था 2 सप्ताह में जांच की जाएं, गुजर गए 2 साल

स्थ्यमंत्रीऔर हरियाणा मेडिकल कांउसिल के आदेशों के बाद भी विभाग के अधिकारी प्राइवेट अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की जांच नहीं कर रहे हैं। जिस कारण निजी अस्पताल मनमानी कर रहे हैं। कार्यवाही नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने फिर से सीएम को शिकायत भेजी है। कष्ट निवारण समिति में भी स्वास्थ्य मंत्री को दोबारा से शिकायत दी जाएगी। 

31 अगस्त को 2015 को हरियाणा एंटी करप्शन सोसाइटी ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को शिकायत दी थी। जिसमें कहा गया सोसाइटी के घायल लोगों को प्राइवेट अस्पताल में दाखिल करवाती रहती है। अस्पताल संचालक घायलों से बिल लेते हैं। मगर बिल की रसीद नहीं देते है। पेज पर लिखकर बिल पकड़ा देते हैं। इससे सरकार को भारी नुकसान है। निजी अस्पतालों में कौन कौन सी सुविधाएं होनी चाहिए। अस्पताल की चार्जिज अन्य तरह की जरूरी सुविधाओं का निरीक्षण करवाया जाए, ताकि लोगों से मनमर्जी की वसूली हो। शिकायत में ये भी कहा गया था कि अस्पताल के अंदर चलने वाले मेडिकल स्टोर पर ही डॉक्टर द्वारा लिखी दवाई मिलती है। ये दवाई बाहर के मुकाबले पर अंदर अधिक रेट में लोगों को दी जा रही है। मजबूरी में लोगों को अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। 

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने कार्रवाई के लिए डायरेक्टर हेल्थ को लिख दिया। डीजी ने प्राइवेट अस्पताल के बारे में कार्रवाई के लिए हरियाणा मेडिकल कांउसिल के रजिस्ट्रार को लिख दिया। रजिस्ट्रार ने कार्रवाई करते हुए सिविल सर्जन यमुनानगर को दो सप्ताह में सभी प्राइवेट अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की जांच दिए गए उपचार का बिल उपलब्ध करवाने के आदेश दिए। साथ ही सभी जिले में प्रेक्टिस करने वाले डॉक्टर्स के रजिस्ट्रेशन की प्रतियां भी मंगवाई थी। लेकिन विभाग ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।