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सात महीने से टेंडर नहीं अब जीएसटी ने रोके शहर के विकास कार्य

 शहर की सरकार बनने के बाद अभी तक वार्डों में विकास कार्य पूरी तरह से नहीं हो पाए हैं। गलियां टूटी-फूटी पड़ी हैं तो शहर का सौंदर्यकरण रूका हुआ है। पार्षद व उनके प्रतिनिधि आए दिन नगरपरिषद के चक्कर काट रहे हैं। सभी की निगाहें नगरपरिषद द्वारा जारी होने वाले टेंडर पर है, लेकिन टेंडर पर ग्रहण लगा हुआ है। शहर में पिछले सात महीने से वार्डो के विकास कार्यों के लिए टेंडर ही जारी नहीं हुए हैं। अब जुलाई में नगरपरिषद ने टेंडर जारी किए लेकिन ठेकेदार लेने को तैयार नहीं है। अगले सप्ताह सभी वार्डों के लिए नगरपरिषद दोबारा टेंडर जारी करने जा रहा है। करीब 5 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के टेंडरों को लेने से ठेकेदारों ने एक बार फिर इंकार कर दिया है। ठेकेदारों का कहना है कि जब तक जीएसटी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती है तब तक किसी भी प्रकार के टेंडर नहीं भरेंगे।

नगरपरिषद में विकास कार्यों के टेंडर लेने वाले ठेकेदारों का कहना है कि पहले सवा 5 फीसदी टेक्स लगता था। इसके अलावा एक फीसदी लेबर तथा एक फीसदी इंकम टेक्स भी अलग से है। लेकिन अब ठेकेदारों को 18 फीसदी टेक्स देना होगा। इसको लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ठेकेदार इतना टेक्स नहीं दे सकते। नगरपरिषद के पास अभी तक कोई गाइडलाइन भी नहीं आई है। पुराने रेटों के अनुसार नगरपरिषद टेंडर जारी कर रहे हैं, जबकि सामान जीएसटी लगने के कारण महंगा हो गया है।