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पार्टी पदाधिकारी बोले- हमारे कहने से नहीं किए जा रहे काम

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के प्रवास के पहले दिन बड़ी संगठनात्मक बैठक में कई तरह के सुझाव और समस्याएं सामने उभरकर आईं। इस दौरान कई पदाधिकारियों ने अपनी समस्याओं को गिनाया। उनका कहना था कि हमारे कहने तो सरकार कोई काम कर रही और अफसर। नौकरी और तबादला आदि भी हमारे कहने पर नहीं हो रहे। 

इस पर शाह ने कहा कि भाजपा पदाधिकारी सरकार के पर निजी सिफारिशें लेकर ना जाएं। सरकार बिना किसी दबाव में काम करेगी। हालांकि बैठक में आते ही शाह ने स्पष्ट कर दिया था कि मैं आज सिर्फ सुनूंगा, बोलूंगा नहीं। लेकिन भाजपा की सरकार के दो नेताओं ने गुहार लगाते हुए दो प्रतिक्रिया दीं, जोकि पूरी बैठक में ही चर्चित रहीं। पुंडरी से भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रणधीर गोलन ने बताया कि लोग काम के लिए हमारे पास आते हैं और उनके काम करवाने को सीएम से मिलने के लिए महीनों से समय मांग रहे हैं, लेकिन मिलने का समय ही नहीं देते हैं। तो समय दिया जाए। पुराने लोगों की समस्याओं को भी सुना जाए। इस सुझाव कम शिकायत से पूरे सभागार में सन्नाटा पसर गया। रणधीर गोलन 3 बार भाजपा के पुंडरी से प्रत्याशी रह चुके हैं, लंबे समय से संघ और फिर संगठन से भी जुड़े रहे हैं, उनके इस सुझाव पर सीएम मनोहर लाल और प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला भी एक बार सोच में पड़ गए। बैठक के बाद रणधीर गोलन से जब बात की गई तो उन्होंने इसे संगठन का अंदरूनी मामला बताया। 

वहीं, इसी तरह से सुझाव देते समय ऐलनाबाद से पूर्व विधायक मनीराम केहरवाल ने भ्रष्टाचार को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने बैठक में कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस और पारदर्शी सरकार की लोग बात कर रहे हैं, लोगों के मुताबिक कार्यकर्ताओं तक तो इनका पालन हो रहा है, लेकिन कई मंत्रियों के नजदीकी ही भ्रष्टाचार फैलाने में लगे हैं। बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. अनिल जैन, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, प्रदेश संगठन मंत्री सुरेश भट्ठ मौजूद रहे। 

देश में 70 से 80 फीसदी बूथों पर ही भाजपा का संगठन मजबूत हो पाया है। ऐसे में अब बचे हुए बूथों को लेकर संगठन को मजबूत करने के टिप्स अमित शाह ने पहले दिन की 4 बैठकों में कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों को दिए। शाह ने कहा कि हरियाणा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी विस्तारक योजना के बाद तैयार किए गए बूथों की नियमित तौर पर ग्रेडिंग करते हुए उन बूथों को मजबूत किया जाए। शाह का पूरा जोर लोकसभा विधानसभा के दौरान कमजोर सीटों पर रहा। सीधे तौर पर उनकी ओर से मिशन-2019 के लिए ही रूपरेखा बनाई जा रही है। बता दें कि हरियाणा देश में ऐसा पहला राज्य है जहां सरकार बनने के बाद भाजपा को संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी है। इससे पूर्व अधिकतर राज्यों में पार्टी संगठनों को मजबूत किया गया और फिर सरकार बनाने की दावेदारी पेश की गई। 


शाह के साथ कोर ग्रुप की बैठक में 9 से 30 अगस्त तक राष्ट्र विचारधारा को बुलंद करने के लिए तिरंगा और मशाल यात्राएं निकालने की रणनीति पर भी मुहर लगी। इसका मकसद राष्ट्रीय सोच को विकसित करना है। 14 अगस्त को देशभक्ति गीतों के कार्यक्रम और 15 अगस्त को भाजपा शक्ति केंद्रों पर ध्वजारोहण करने की योजना को मंजूरी दी।