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सरकारी स्कूलों में खुलेंगे 'प्रतिभा' के पुस्तकालय

बेहतर से बेहतर की तलाश करो, मिल जाए नदी तो समंदर की तलाश करो। टूट जाता है शीशा पत्थर की चोट से, टूट जाए पत्थर ऐसा शीशा तलाश करो। इन्हीं पंक्तियों को जीवन में उतारकर समाज की स्थिति को सुधारने में जुटी हैं अंबाला की 'प्रतिभा'। अंबाला शहर के सौंडा गांव में रहने वाली डॉ. प्रतिभा ¨सह ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की स्थिति सुधारने के लिए अच्छी पहल की है। अब वह बिना किसी प्रशासनिक सहयोग से खुद के दम पर सरकारी स्कूलों में पुस्तकालय खोलेंगी ताकि पुस्तकों के अभाव में किसी भी विद्यार्थी का सामान्य ज्ञान कम न रहे। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को तो मार्गदर्शन मिल जाता है लेकिन सरकारी स्कूलों के बच्चे मार्गदर्शन के साथ-साथ आर्थिक तंगी के भी शिकार हो जाते हैं। अलबत्ता उन्हें स्कूल से सिलेबस का ज्ञान तो मिल जाता है लेकिन सामान्य ज्ञान में वह पिछड़ जाते हैं।

डॉ. प्रतिभा ¨सह ने शहर के 20 सरकारी स्कूलों में 100-100 किताबों के साथ पुस्तकालय खोलने का निर्णय लिया है। इस कार्य में वह स्कूल और प्रशासनिक अधिकारियों से किसी भी तरह का कोई सहयोग नहीं लेंगी। हालांकि अपनी सहेलियों और रिश्तेदारों से इसके लिए वह सहयोग जरूर मांगेंगी। सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को उठाने के लिए उन्होंने यह निर्णय लिया है।

सारंगपुर के माध्यमिक स्कूल से की शुरुआत

मंगलवार को अंबाला शहर के सारंगपुर गांव से उन्होंने अपने इस अभियान की शुरुआत कर दी है। सारंगुपर के राजकीय माध्यमिक स्कूलों में पहुंचकर डॉ. प्रतिभा ¨सह ने 100 पुस्तकें पुस्तकालय के लिए भेंट की। इन पुस्तकों को स्कूल के कार्यालय में रखा गया है। इनमें चंपक, नंदन, सुमन सौरभ, मालगुड़ी डेजस, मेरे कलाम, मेरा गांधी, सारथी और सखी के अलावा महान व्यक्तित्व की किताबें शामिल हैं स्कूल को भेंट की। डॉ. प्रतिभा ने बताया कि चित्रात्मक पुस्तकों के साथ-साथ कथा-कहानी की पुस्तकें भी स्कूलों में उपलब्ध कराएंगी ताकि बच्चे मन लाकर पुस्तकों को पढ़ें। इससे उनमें पढ़ने की कला तो विकसित होगी ही साथ ही साथ उनका ज्ञानवर्धन भी होगा। उन्होंने कहा कि उन्हें जिस भी मित्र व रिश्तेदार से जो भी किताब मिलती है वह उससे उसे ले लेती हैं और उसे अपने पास रख लेती हैं ताकि किसी जरूरतमंद के वह काम आ सकें। गौरतलब है कि डॉ. प्रतिभा ¨सह के इसी जज्बे के कारण उन्हें हाल ही में अंबाला के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का ब्रांड अंबेसडर भी बनाया गया है।