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ग्रामीण रूटों पर रोडवेज के बाद निजी बसों का परिचालन भी हो गया है बंद

    हरियाणा परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश के शहरों से लेकर गांवों तक परिवहन सुविधाएं मुहैया कराने का दंभ भरा जा रहा है। लेकिन वास्तविकता से इससे परे है। जिले के करीब आठ रूटों पर करीब पांच साल पहले सरकारी बसें चलती थी। लेकिन बसों का अभाव होने और निजी ऑपरेटरों को रूट अलाट करने के समय इन रूटों को निजी ऑपरेटरों के हवाले कर दिया गया।

      लेकिन कुछ वर्षों बाद सवारियां कम होने के कारण धीरे-धीरे इन रूटों से निजी ऑपरेटरों ने बसों को मोड़ लिया। अब इन गांवों रूट्स पर बसों की सेवाएं नहीं है। जिसके कारण यहां के लोगों को निजी वाहन या फिर ऑटो टैक्सी का सहारा लेना पड़ रहा है। डिपो प्रबंधन का कहना है कि जिन रूट्स पर सवारियों की डिमांड है, वहां बसों की परिचालन किया जा रहा है। 

    डिपो प्रबंधन द्वारा देश के अन्य प्रदेशों सहित प्रदेश के विभिन्न जिले में बसों का परिचालन किया जा रहा है। जिसके लिए सोनीपत डिपो में 232 बसों का बेड़ा है। इन बसों के परिचालन की जिम्मेदारी रोडवेज के ड्राइवर और कंडक्टर उठाते हैं। लेकिन लंबे समय से डिपो से लगातार बसें कंडम होती जा रही है, रूट से इन्हें हटाया जा रहा है। इस कारण से डिपो प्रबंधन को भी बसों का परिचालन करने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। जिसके कारण यात्रियों को लंबे-लंबे समय तक बस स्टाप पर इंतजार करना पड़ रहा है। 

   हरियाणा परिवहन विभाग द्वारा कुछ अतिरिक्त रूट पर निजी ऑपरेटरों को बस का परमिट जारी किया गया है। ताकि वंचित लोगों को भी परिवहन की सेवाएं मुहैया कराई जा सके। प्रदेश सरकार को निजी ऑपरेटरों को जारी किए जाने वाले परमिट में ऐसे में रूट्स का ध्यान रखना चाहिए, जहां पर पर बसों का परिचालन नहीं हो रहा है। ताकि ऐसे इलाकों से परिवहन सेवाओं को जोड़ा जा सके। यात्रियों को राहत मिल सके।