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थम नहीं रहा महिलाओं की चोटी कटने का सिलसिला, ग्रामीण क्षेत्रों के बाद अब शहर में भी कटी एक महिला की

महिलाओं की चोटी कटने के मामले ग्रामीण क्षेत्रों बाद अब शहरी क्षेत्र में भी सामने आ रहे हैं। शुक्रवार देर रात अशोक विहार एरिया में एक महिला की चोटी कट गई। महिला का कहना है कि एक व्यक्ति ने जैसे उसका हाथ पकड़ा वह बेहोश हो गई। होश आने पर उसकी चोटी कटी हुई थी। परिजन महिला को निजी अस्पताल ले गए, जहां इलाज होने पर तबीयत में सुधार के बाद उसे घर भेजा गया। मामले में परिजनों ने पुलिस को शिकायत नहीं दी है।

अशोक विहार एरिया में सुनीता देवी परिवार के साथ रहती है। शुक्रवार देर रात उनकी बहू व पोता पहली मंजिल पर बने कमरे में बैठे टीवी दे रहे थे। इस दौरान उनके पड़ोस का बच्चा भी वहीं था। रात करीब साढ़े 10 बजे उनका बेटा आया और अपने कमरे में चला गया। खाना खाने के बाद उनका बेटा दोबारा अपने कमरे में चला गया। कुछ देर बाद उनके घर खेल रहा पड़ोसी का बच्चा भी लौट गया। उसके जाने के बाद सुनीता देवी ने घर का मेन गेट बंद किया। मुड़ते ही उन्हें पीले कुर्ते व काली धोती में एक व्यक्ति घर के आंगन में दिखा। जैसे ही वो अंदर बढ़ी तो वो शख्स गायब हो गया। अंदर आने के बाद वो उन्हें रसोई में दिखा। इस पर उन्होंने अपने बच्चों को आवाज दी। जब वो रसोई में भी नहीं दिखा तो वो बाहर आने लगी। वह बाथरूम के पास पहुंचते ही उस शख्स ने उनका हाथ पकड़ लिया, घबराकर सुनीता देवी बेहोश हो गईं। इसी दौरान उसने उनकी चोटी काट दी। जब उनके बच्चे नीचे पहुंचे तब तक सुनीता देवी उन्हें बेहोश मिली और उनके बाल कटे हुए थे। परिजन उन्हें रेलवे रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। यहां डॉक्टर्स ने उनका ट्रीटमेंट किया। हालत में सुधार होते ही उन्हें छुट्टी दे दी गई। परिजनों ने बताया कि मामले में पुलिस को कोई शिकायत नहीं दी गई है। बाल एक तरफ से कटे हुए हैं।

गुड़गांव जिले में महिलाओं की चोटी कटने की यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले 10 दिनों में इस तरह की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। गुड़गांव जिले के गांव जनौला से महिलाओं की चोटी कटने की शुरुआत हुई। इसके 24 घंटे बाद गांव गुढाना में यह घटना घटित हुई थी। इसके बाद फर्रुखनगर एरिया में भी चोटी कटने की घटनाएं सामने आईं। इसके बाद से महिलाओं में दहशत का माहौल है।
 
 
दिमाग से डर निकालकर दूर करें अंधविश्वास : डॉ ब्रह्मदीप
चोटी काटने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसे लोग अंधविश्वास की नजर से जोड़कर देख रहे हैं। सिविल अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मदीप ने बताया कि लोगों में यह अंधविश्वास है कि चोटी कटने वाली महिला की मौत हो जाती है, लेकिन इस तरह का कोई केस नहीं है। यह इसलिए हो रहा है कि समाज के ज्यादातर लोग अंधविश्वासी हैं। कुछ लोगों ने रंजिशन किसी महिला के बाल काटकर अंधविश्वास फैला दिया जिसके बाद से महिलाओं में डर बैठ गया। इस बात से बिल्कुल भी इंकार नहीं किया जा सकता कि महिलाओं के बाल काटे जा रहे हैं। इसका प्रमाण तो सभी के सामने आ रहा है, लेकिन यह किसी शरारती तत्व की शरारत हो सकती है। न तो किसी व्यक्ति के पकड़ने से कोई बेहोश हो सकता है और न ही किसी व्यक्ति को गायब हो सकता है। अंधविश्वास ने ही लोगों को पैनिक कर दिया है। लोगों को इसके प्रति जागरूक होना पड़ेगा।
 
कमरे में आटा लेने गई युवती की कटी चोटी
मेवात में अब तक अलग -अलग गांवों में चोटी कटने की करीब 18 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। शुक्रवार को पिनगवां कस्बे में करीब साढ़े 4 बजे आबरिन पुत्री आसीन उम्र 15 वर्ष जब कमरे में आटा लेने गई , तो उसे काली बिल्ली नजर आई, जिसे देखकर वो बेहोश हो गई। कुछ देर बाद जब घर के लोग अंदर गए तो बच्ची बेहोश पड़ी थी और उसकी चोटी कटी हुई थी।