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महापुरूषों के बताए मार्ग पर चलते हुए महिला उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए -चौ0 बीरेन्द्र

परिवर्तन प्रकृति का सास्वत नियम है और नई सूचना क्रांति के वर्तमान युग में सोशल मीडिया के कारण आज सारा विश्व एक ग्लोबल विलेज बन गया है। आज संसार का कोई भी व्यक्ति परिवार अथवा देश अकेले रहकर जीवनयापन नही कर सकता। आज दूनिया के अधिकतर देश और धर्म, मानवता को सर्वोपरि मानते हुए महिलाओं को समान अधिकार दे रहे हैं। भारत में यह मान्यता प्राचीन काल से ही रही है जहां महिलाओं का सम्मान होता है वहां देवता निवास करते हैं। इसी लिए राष्ट्र पिता महात्मा गांधी, बिनोवा भावे, सर छोटूराम और निर्मला देशपाण्डे ने सारा जीवन मानवता को स्थापित करने में लगा दिया। इसलिए हमें इन महापुरूषों के बताए मार्ग पर चलते हुए महिला उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए ताकि स्वतंत्रता सेनानियों के महिला सशक्तिकरण के सपने को साकार किया जा सके। यह विचार केन्द्रीय इस्पात मंत्री चौ0 बीरेन्द्र ङ्क्षसह ने सैक्टर 25 में निर्मला देशपाण्डे संस्थान की ओर से आयोजित प्रतिभा स्मृति सदन शिलान्यास एवं प्रतिभा सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।  इस समारोह में भारत के विभिन्न प्रदेशों की 11 महिला समाज सेवियों को सम्मानित किया गया। 
चौ0 बीरेन्द्र सिंह ने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि समय तेजी से बदल रहा है और परिवर्तन के इस दौर में सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक क्षेत्र की मर्यादाओं में भी परिवर्तन आने लगा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में प्राचीनकाल से ही महिलाओं का सम्मान रहा है और आज हरियाणा की बेटियां, भारतीय सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस विभाग, राष्ट्रीय व अंर्तराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, महिला व बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग में अपनी सेवाओं का बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। हरियाणा में आपसी भाईचारे और मानवतावादी सोच के साथ पंचायतों के माध्यम से गम्भीर से गम्भीर समस्याओं का समाधान भी कर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि आज कोई भी व्यक्ति अकेला नही रहा सकता। दूनिया में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। रफ्तार के इस दौर में कोई व्यक्ति पीछे छूट गया तो वह व्यक्ति पीछे ही रह जाएगा। 
उन्होंने कहा कि आज भारत भी विकासशील देश की परिभाषा से तेजी से बाहर निकल रहा है और अब वह समय दूर नही जब भारत की गणना विकसित देशों में होने लगेगी। उन्होंने कहा कि यदि समाज में महिला-पुरूष को समाज में समान दर्जा देना है तो नौकरियों में न केवल महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए बल्कि पुरूषों से अधिक वेतन महिला कर्मचारियों को यदि दे दिया जाए तो समाज में महिलाओं की ईज्जत दोगुनी हो जाएगी। 
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि उन्होंने राजनीति को बहुत नजदीके से देखा है। उनके पास इस क्षेत्र का 45 साल का अनुभव है। जिसके आधार पर वे बात पूरे आत्मविश्वास के साथ कह सकते हैं कि महिलाओं को हर क्षेत्र में पीछे धकेलने में किसी ना किसी रूप में किसी ना किसी महिला का ही हाथ होता है। अब समय आ गया है कि लोग उन महिलाओं का सम्मान करें जो किसी भी क्षेत्र में देश-विदेश में भारत का सम्मान बढाती हों। उन्होंने कहा कि विश्व के किसी भी धर्म अथवा वेद-पुराण में सती प्रथा, अत्याचार और दहेज प्रथा को स्वीकृति नही दी गई है। 
उन्होंने कहा कि भारत तो प्राचीनकाल से ही सारे विश्व को अपना परिवार मानता आ रहा है। वसुधैव कुटुम्ब कम्ब के माध्यम से मानवता की रक्षा के लिए हमेशा ही तत्पर रहा है लेकिन अमेरिका ने पहली बार पाकिस्तान पर दिए जाने वाले फण्ड पर रोक लगाई है। जिससे भविष्य में आतंकवादी घटनाओं में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि हिटलर ने जब मानवता को तार-तार करने का प्रयास किया तो वह भी अपनी योजना में सफल नही हो पाया। इसलिए लोगों को निर्मला देशपाण्डे संस्थान प्रतिभा स्मृति सदन समिति और ब्रैक थ्रू और माता सीता रानी सेवा संस्था जैसी संस्थाओं से प्रेरणा लेकर हमेश मानवता की रक्षा के लिए तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने प्रतिभा स्मृति सदन के निर्माण के लिए अपने ऐच्छिक कौष से 11 लाख रूपये की राशि देने की घोषणा की। समारोह का शुभारम्भ वन्दे मात्रम के साथ हुआ। समारोह को हॉली अपना स्कूल के अध्यक्ष ओपी माटा, अरूणांचल की जार्जुम ऐटे, प्राचार्या नीलिमा कामरा, सरपंच प्रियंका शर्मा, कंचन सागर, राममोहन राय, दीपक कुमार, राजेन्द्र हलदाना, डा0 शंकरलाल शर्मा, दीपांकर, उर्मिला श्रीवास्तव, बिमला शाहजहांपुर, मालती ने भी सम्बोधित किया। इससे पूर्व मुख्यअतिथि ने डा0 सुभाषचन्द्र द्वारा लिखित उद्यम सिंह की आत्मकथा नामक पुस्तक का विमोचन किया और प्रतिभा स्मृति सदन की आधारशिला रखी।