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स्वास्थ्य ढांचा तैयार, सुविधाओं का इंतजार

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का ढांचा जरूर खड़ा कर दिया गया है, लेकिन यहां के लोग अब तक इनके लाभ से वंचित हैं। तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अभी तक हॉटलाइन से जुड़ नहीं पाए हैं। यहां न ही चिकित्सक पर्याप्त हैं और न ही स्वास्थ्य सुविधाएं। उपस्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति तो और भी बदतर है। कई उपस्वास्थ्य केंद्रों की इमारत जर्जर है तो कुछ पंचायत के उधार दिए गए कमरों में चल रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों के पास शहर की ओर रुख करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचता।

मुख्यमंत्री ने करीब एक साल पहले झांसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण किया था। इसमें आज तक चिकित्सा अधिकारियों के सभी छह पद खाली पड़े हैं। सीएचसी संभालने के लिए वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी को तो यहां नियुक्त कर दिया गया, लेकिन ओपीडी के चलाने के लिए उन्हें एक भी चिकित्सा अधिकारी नहीं मिला। करीब सात करोड़ की लागत से तैयार ये इमारत निजी अस्पतालों को भी मात देती है। मगर चकाचक दिखने वाली इमारत में मरीजों का उपचार करने वाले चिकित्सक उपलब्ध नहीं है। यही हाल दूसरे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के भी हैं।

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में पिहोवा भी काफी पीछे है। यहां सात में से चार चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं। जबकि 30 जुलाई को मुख्यमंत्री मनोहर लाल पिहोवा में 50 बेड के अस्पताल की आधारशिला रखने वाले हैं। सीएचसी झांसा के साथ मथाना और लाडवा भी आज तक हॉटलाइन से जुड़ नहीं पाया। स्वास्थ्य विभाग मथाना सीएचसी को हॉटलाइन से जोड़ने के लिए बिजली निगम को कई वर्ष पहले अनुमानित राशि भी दे चुका है, लेकिन आज तक ये केंद्र हॉटलाइन से नहीं जुड़ पाए। हालांकि ऑपरेशन थियेटर व लेबर रूम जैसे आपातकालीन केंद्रों में बिजली आपूर्ति के लिए जनरेटर की व्यवस्था की गई है, लेकिन यह नाकाफी है। ऑपरेशन व लेबर रूम में प्रयोग होने वाली बड़ी फोकस लाइटों को इनके साथ जोड़ा नहीं जा सकता और इन लाइटों के बगैर आपरेशन मुश्किल है।