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मासिक परीक्षाओं में अव्यवस्थाएं भारी, समय पर नहीं पहुंच रहे प्रश्नपत्र

: सरकारी स्कूलों में चल रही मासिक परीक्षाएं अव्यवस्थाओं की शिकार हैं। कई स्कूलों में समय पर प्रश्नपत्र नहीं पहुंच रहे हैं, तो कई स्कूलों में प्रश्नपत्र कम मिलने के कारण उनकी फोटो कॉपी करानी पड़ रही है। अव्यवस्था का आलम यह है कि बृहस्पतिवार को संस्कृत की जगह ड्राइंग का प्रश्नपत्र भेजने से कई स्कूलों में संस्कृत की परीक्षा नहीं हो सकी।

उल्लेखनीय है कि मासिक परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी जिलास्तर पर शिक्षा विभाग की होती है। संबंधित एजेंसी को प्रश्न पत्र तैयार कर दो दिन पहले खंड शिक्षा विभाग कार्यालय में भेजने होते हैं। इसके बाद वहां से स्कूलों में प्रश्न पत्र भेजे जाते हैं। स्कूल मुखिया पेपर शुरू होने से पहले संबंधित विषय का लिफाफा खोलते हैं। एजेंसी समय पर प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं करा रही है और परीक्षा वाले दिन सुबह खंड कार्यालयों में प्रश्नपत्र भेजे जा रहे हैं। इससे स्कूलों में प्रश्नपत्र समय पर नहीं पहुंच रहे हैं। लिफाफों में छात्र संख्या के हिसाब से पूरे प्रश्नपत्र न मिलने के कारण फोटो स्टेट करानी पड़ रही है। इतना ही नहीं कई स्कूलों में लिफाफे खाली मिल रहे हैं। इसके अलावा लिफाफे पर जिस विषय का नाम लिखा होता है, अंदर उस विषय के प्रश्नपत्र नहीं मिलते हैं। बृहस्पतिवार को स्कूलों में संस्कृत के प्रश्नपत्र वाले लिफाफे में ड्राइंग के प्रश्नपत्र मिले। शुक्रवार को कई स्कूलों में 11वीं कक्षा के फिजिक्स के प्रश्नपत्र नहीं पहुंचे। जिन स्कूलों में प्रश्नपत्र कम मिल रहे हैं या नहीं पहुंचे, उन स्कूलों से विभाग ने रिपोर्ट मांगी है।

एजेंसी समय पर पेपर उपलब्ध नहीं करा रही है। प्रश्नपत्र भी कम मिल रहे हैं। कुछ स्कूलों में गलत प्रश्नपत्र भी भेजे गए हैं। इसके बारे में स्कूलों से रिपोर्ट मांगी जा रही है, जो निदेशालय भेजी जाएगी। स्कूल मुखिया को प्रश्नपत्र परीक्षा से कुछ देर पहले खोलना होता है, इसलिए उन्हें पता नहीं चल पाता है कि लिफाफे में प्रश्नपत्र पूरे हैं या नहीं।