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अंतरिक्ष से जुड़ीं पहेलियां सुलझी हरसैक की साइंस एग्जिबिशन में

स्पेससूट, ड्राई आइस और एरोजेल मेटेरियल अंतरिक्ष यात्रा से जुड़े तमाम सवालों के जवाब स्टूडेंट्स को एग्जिबिशन में मिले। जिन्हें वह सिर्फ किताबों में पढ़ते थे या सुनते थे। मौका था एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर एचएयू के हरसैक में आयोजित चार दिवसीय साइंस एग्जिबिशन का। इसमें मिसाइल के मॉडल और तस्वीरों के माध्यम से स्कूली बच्चों ने मिसाइल मैन और स्पेस से जुड़ी चीजों को जाना। एग्जिबिशन का शुभारंभ एडीसी एएस मान ने किया। डीपीसी देेवेंद्र सिंह और अनिल मेहता ने बच्चों को स्पेस के बारे में जानकारियां दीं।
 
स्पेस सूट में होता है खास
 
अनिलमेहता ने बताया कि स्पेस सूट को बनाने में नायलॉन अौर टेफलॉन की 13 लेयर होती है। इसका हेलमेट इतना मजबूत होता है जिससे बुलेट भी क्रॉस नहीं हो सकती है। इसमें ऑक्सीजन से लेकर बॉडी वेस्ट को खत्म करने का अरेंजमेंट होता है। इसे पहनने के बाद गर्मी लगे, इसके लिए इसमें वाटर की ट्यूब होती है जो टेम्प्रेचर को नार्मल बनाए रखती है।
एग्जीबिशन में शहर के स्कूलों के विद्यार्थियों को अलग-अलग दिन बुलाया गया। वहीं 30 जुलाई को अोपन सेशन रखा गया है, जिसमें शहर के किसी भी इंस्टीट्यूट से स्टूडेंट्स और आम शहरी ग्रामीण एग्जीबिशन देख सकते हैं।
 
एग्जिबिशन में तीन स्कूलों से आए स्टूडेंट्स ने सवाल किए। एक स्टूडेंट ने पूछा कि क्या वह स्पेस में जा सकते हैं तो अनिल मेहता ने बताया कि सभी स्पेस में जा सकते हैं, इसके लिए कई कैटेगरी होती है। मगर वहां पर जाने से पहले आपको अपनी स्ट्रीम में महारत के साथ अनुभव भी होना चाहिए। नासा इसके लिए टेस्ट कंडक्ट कराता है। जिसके क्लियर होने के बाद साल दो साल की ट्रेनिंग दी जाती है जिसमें फिजिकल से लेकर साइकोलॉजिकल स्तर स्पेस के वातावरण के अनुसार मापा जाता है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आप स्पेस में जा सकते हैं।
 
जीवन की हर कहानी बयां हुईं तस्वीरों में
 
सपनेवो नहीं जो बंद आखों से देखे जाएं, सपने तो वो हैं खुली आंखों से देखे जाते हैं। एेसा ही कहा अब्दुल कलाम ने और उनके खुली आंखों से देखे हुए सपनों को प्रदर्शनी में लगीं हर तस्वीर ने बयां किया। अब्दुल से मिसाइलमैन बनने तक की कहानी और उनके विचारों को दर्शाया गया। प्रदर्शनी के आयोजक अनिल मेहता ने बताया कि उन्हों