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दुष्कर्म के बाद नाबालिग हुई गर्भवती, पुलिस ने बिना लगाया SC-ST ACT

भाई को जान से मारने की धमकी देकर शहजादपुर के एक गांव में रहने वाला युवक नाबालिग को अपनी हवस का शिकार बनाता रहा। जब वह गर्भवती हुई तो उसने अपने जानकार डॉक्टर से कहकर उसे गर्भपात की दवा खिला दी। बात नहीं बनी तो नाबालिग ने सारी बात अपने परिजनों को बता दी। इस पर महिला पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ दुराचार सहित अन्य धाराओं का इस्तेमाल करते हुए एससी-एसटी एक्ट लगा दिया। खास बात यह है कि अपनी शिकायत में पीड़िता ने एक भी जगह युवक पर जातिसूचक शब्द कहने के आरोप नहीं लगाए। अब इस मामले की जांच डीएसपी रेंक की अधिकारी कर रही हैं।

पीड़िता का कहना है कि बीती 14-15 फरवरी को पड़ोस में रहने वाले जितेंद्र ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। जिसने उसे यह बात किसी को बताने पर भाई को जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद वह उससे लगातार 10-15 बार बिना मर्जी शारीरिक संबंध बना चुका था। 12 जून को एक बार फिर जितेंद्र ने उसे दुराचार किया। तब उसकी तबीयत खराब रहने लगी। जब उसने चेकअप करवाया तो गर्भवती होने का पता चला।
 
डाॅ. अमन से ली थी गर्भपात की दवा
 
जैसे ही जितेंद्र को नाबालिग के गर्भवती होने की बात पता चली, उसी समय उसने दोबारा जांच के लिए कहा। पक्का होने पर जितेंद्र ने उससे कहा कि वह डा. अमन के पास चली जाए। वह उसे गर्भपात की दवा दे देगा। जिसे लेने के बाद वह ठीक हो जाएगी। लिहाजा जितेंद्र के कहने पर वह डा. अमन से दवा लेकर आ गई। मगर दवा खाने पर भी गर्भपात नहीं हुआ और अब वह एक-दो माह की गर्भवती हो गई है। जिसका सिटी सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है।
 
 
बिना आरोप पुलिस ने लगाया एससी-एसटी एक्ट
 
 
किसी भी केस में पुलिस को जो भी शिकायत मिलती है, पुलिस उसके मुताबिक ही धाराओं को लगाती है। अपनी मर्जी से पुलिस एक भी धारा नहीं लगा सकती। अगर पीड़िता ने इस केस में जातिसूचक शब्द बोलने की बात नहीं कहीं या ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया तो पुलिस एससी-एसटी एक्ट नहीं लगा सकती। खास बात यह है कि एससी-एसटी एक्ट भी तभी लगता है, जब यह बात पब्लिकली कही गई हो। यह पुलिस की सीधे तौर पर मनमानी है।