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सरकारी रिकॉर्ड में 30, शहर में बिना रजिस्ट्रेशन जांच चल रहे 150 पीजी

कॉलेजमें हॉस्टलों की संख्या कम होने की वजह से विद्यार्थियों को पीजी का सहारा लेना पड़ेगा। शहर में चार यूनिवर्सिटी और कई बड़े कॉलेज होने की वजह से गली-गली में पीजी का कारोबार खूब फल रहा है। शहर में 150 से ज्यादा पीजी चल रहे हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इनकी संख्या केवल 30 ही है। मनमर्जी की सुविधाओं के बीच इनमें रहने वालों का कोई रिकाॅर्ड मेंटेन नहीं किया जाता। इनमें रहने वालों की कोई वेरीफिकेशन नहीं करवाई जाती।

पीजी की सुरक्षा के भी बंदोबस्त नहीं हैं। इससे ये पीजी सुरक्षा की दृष्टि से भी खतरा हैं। पीजी में नियमों की भी जमकर अनदेखी की जा रही है। खाने की क्वालिटी की तरफ भी ध्यान नहीं दिया जाता। नगर निगम, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि पीजी में रहने वाले 5 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा के साथ-साथ आस-पास के इलाके भी सुरक्षित रह सकें। पीजी संचालकों की ओर से मोटी रकम वसूलने के बावजूद रजिस्ट्रेशन करवाकर सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

देव कॉलोनी में रहने वाले स्टूडेंट्स ने बताया कि सुविधाएं मांगने पर उनकी सिक्योरिटी जब्त करने की चेतावनी दी जाती है। वहीं, कई बार तो पीजी में रहने वाले ही मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। पीजी में चोरी होना तो आम बात है।

नए सर्वे में तैयार होगा लेखाजोखा

निगम के रिकाॅर्ड में लगभग 30 पीजी संचालित हैं, लेकिन वर्तमान में इनकी संख्या अधिक है। प्राॅपर्टी टैक्स के लिए कराए जाने वाले नए सर्वे में इनका लेखाजोखा तैयार करवाया जाएगा ताकि टैक्स वसूली के साथ ही इन पर हर समय निगरानी रखी जा सके। -हरीशदुग्गल, जेडटीओ, नगर निगम 

वर्तमानमें चल रहे पीजी, हाॅस्टल का रिकार्ड नगर निगम में भी पूरा नहीं है। 28 फरवरी को हुई निगम की बैठक में हाउसटैक्स के लिए नया सर्वे कराने का निर्णय लिया गया था। इसकी शुरुआत भी हुई, लेकिन निगम कमिश्नर प्रदीप कुमार ने कार्यभार संभालते ही सर्वे पर रोक लगा दी। टैक्स ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया कि पीजी संचालकों पर कॉमर्शियल एक्टिविटी का टैक्स लगना चाहिए। निगम को इस वजह से कर के रूप में लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है, फिर भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। पीजी संचालकों की उच्चाधिकारियों से मिलीभगत है, जिसकी कारण तो उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई की जा रही है और ही उनसे टैक्स वसूलने का प्रबंध किया जा रहा है।

इन इलाकों में पीजी ज्यादा

शहरकी देव काॅलोनी, दरियाव नगर, मॉडल टाउन, लाढ़ौत रोड, शीला बाईपास, विनय नगर, चाणक्य पुरी, टेक नगर, प्रेम नगर, दुर्गा कॉलोनी तथा रेलवे स्टेशन के आसपास पीजी ज्यादा हैं। सबसे ज्यादा पीजी का कारोबार देव कॉलोनी में बढ़ रहा है क्योंकि एमडीयू, नेकीराम कॉलेज जाट एमकेजेके कॉलेज पास में हैं।

2900 से 6500 रुपए तक प्रति माह चार्ज

मोटीकमाई के चक्कर में इससे जुड़े लोगों ने रिहायशी इलाकों में घरों में पीजी खोल रखे हैं, जहां 2900 रुपए से लेकर 6500 रुपए प्रतिमाह तक चार्ज वसूले जाते हैं। बदले में उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार सहूलियतें दी जाती हैं। तो खाने-खिलाने के नार्म्स पूरे किए जा रहे हैं और ही आने जाने के समय की पाबंदी है। एक-एक कमरे में 4-5 स्टूडेंट रहते हैं। अधिकतर पीजी में सिक्योरिटी जमा करवाई जाती है। इस वजह से वहां से शिफ्ट करना भी मुश्किल हो जाता है। लिहाजा आधी रात के बाद भी पीजी में रहने वाले युवा सड़कों-गलियों में मस्ती करते नजर आते हैं। शहर में कई एेसे प्वाइंट भी हैं जहां हुक्का बार भी चलाया जा रहा है। वहां भी पीजी स्टूडेंट का डेरा रहता है।

4 यूनिवर्सिटी की वजह से कारोबार बढ़ा, 8 हजार युवा लेते हैं पीजी कमरे

शहरमें एमडीयू, हेल्थ यूनिवर्सिटी, स्टेट यूनिवर्सिटी और बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के अलावा नेकीराम कॉलेज, आईसी कॉलेज, वैश्य कॉलेज और जाट कॉलेज जैसे बड़े शिक्षण संस्थान हैं। यहां पर हॉस्टल के लिए कमरों की मारामारी रहती हैं। एमडीयू और नेकीराम आईसी काॅलेज में ही 25 हॉस्टलों में 5300 सीटों के विपरित 10 हजार आवेदन आते हैं। इन 5 हजार युवाओं के अलावा 2 से 3 हजार अन्य युवा पीजी लेते हैं। ज्यादातर विद्यार्थी पीजी को ही पसंद करते हैं। वहीं, शहर में इंडस्ट्रियल एरिया की वजह से भी पीजी की डिमांड ज्यादा है। शहर की एक कॉलोनी में बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर चल रहे हैं पीजी, लेकिन प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं।