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दिव्यांग खिलाड़ियों से प्रेरणा लेकर, इन खिलाड़ियों की बदल गई जिंदगी

.भूड़ला खेल परिसर में अभ्यास करने वाले तीन खिलाड़ियों की जिंदगी में दुख कम नहीं थे। हादसों के बाद तीनों युवक शारीरिक तौर पर सामान्य नहीं रहे थे। इसके चलते वे खुद को काम करने में असमर्थ पाकर परेशान होते, लेकिन एक दिन इन्होंने जब पैरालिंपिक खेलों में खिलाड़ियों को दौड़ते देखा तो प्ररेणा लेकर खुद भी खेलों में करियर बनाने की ठानी।अब ये तीनों 3 खिलाड़ी शॉटपुट का अभ्यास करते हैं। हर दिन 50 से ज्यादा बार गोला फेंकना, हाथ स्प्रिंग को खोलना और अन्य अभ्यास करना इनकी दिनचर्या का हिस्सा है। तीनों मौत को मात देकर जिंदगी जीने की राह पर चल पड़े हैं। 12 साल से स्पाइनल इंजरी से जूझते हुए तीनों ने 5 माह से शॉटपुट खेल में करिअर बनाने की ठानी है।

 
इनका हौसला बढ़ाने के लिए मैदान पर गांव के लोग भी प्रोत्साहित करते हैं। डीएसओ भारत ग्रोवर और एथलेटिक्स कोच भीम अवार्डी सतबीर सिंह कहते हैं कि इनका जज्बा ही निखार लाएगा। खेल से जिंदगी में बदलाव नजर आने लगेगा। सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।

छत से गिरकर टूटी रीढ़ की हड्डी, बिस्तर पर की एमए
 
- नहचाना निवासी मोहित यादव ने बताया कि वर्ष 2000 में नौंवीं कक्षा में था, घर की दूसरी मंजिल से सुबह नीचे उतरने लगा तो छज्जा टूट रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई।
- 12 साल से भी ज्यादा बेड पर रहा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 10वीं, 12वीं, बीए और एमए अंग्रेजी की। अब स्कूल में बच्चों को पढ़ाता है।
- जिंदगी को सामान्य होने में बरसों लग गए। 5 माह पहले वह कोच सतबीर सिंह के साथ शॉटपुट की प्रैक्टि्स करता है। जल्द खेलने जाएगा।