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ये है अंग्रेजों के जमाने की पनचक्की, आज भी इस चक्की का पीसा आटा खाते हैं लोग

हम में से अधिकतर लोगो ने बिजली से चलने वाली आटा चक्की देखी है, कुछ पुराने लोगों ने हाथ से चलने वाली चक्की भी देखी होगी, लेकिन ऐसे बहुत कम लोग होंगे जिन्होंने पानी से चलने वाली आटा चक्की देखी हो। हमारे देश में अब कुछ ही पनचक्की बची है,पर इनमें से एक चक्की हरियाणा के कैथल जिले के फतेहपुर पूंडरी में स्थित है। 125 साल पुरानी यह आटा चक्की अंग्रेजों ने 1890 में बनवाई थी

इसकी खास बात ये है कि यह चक्की आज भी चल रही है और लोग इसका पीसा आटा खाते हैं। एक अन्य खासियत यह है कि इससे पीसा हुआ आटा भी एक दम ठंडा होता है। यह भारत कि सबसे पुरानी चालू पनचक्की में से एक है।

- यह चक्की एक नहर पर बनी हुई है। जब नहर में पानी चलता है तो यह चक्की चलती है। इसके लिए नहर का पानी लोहे के बड़े - बड़े पंखों के ऊपर डाला जाता है, जिससे कि वो घूमते है और चक्की चलती है। यहां पर 5 चक्कियां लगी हुई है जो कि एक घंटे में लगभग 200 किलोग्राम गेंहूं कि पिसाई कर देती है।