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नाकाम पुलिस को बदमाशों ने दी फिर नई चुनौती

एक ही गैंग की करतूत हो या कई की, मगर पुलिस के हाथ बदमाशों के गिरेबान तक नही पहुंच रहे हैं। ऐसे में वे लोग अपनी सुरक्षा को लेकर फिर परेशान हैं जो कस्बे या गांव में गांव से बाहर परिवार के साथ रह रहे हैं। क्योंकि इसके पहले भी बदमाश एकांत बने घरों को निशाना बना चुके हैं, और खुद को चपल मानने वाली गुरुग्राम पुलिस उनकी पहचान तक नहीं कर पाई है। फरुखनगर के चांदनगर रोड स्थित किसान हरिराम के घर पड़ी डकैती ने पुलिस के इकबाल पर फिर निशान लगा दिया है। इस घटना ने पुलिस की रात्रि गश्त पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अगर रात में गश्त कर रही होती तो शायद बदमाश वारदात करने से हिचकते।

इसी साल 28 जनवरी को पटौदी के समीपवर्ती गांव किनारे बनी एक फैक्ट्री परिसर में रह रहे दो कर्मचारियों के परिवार को बंधक बना डकैतों ने लूटपाट की थी। लुटेरों ने दो महिलाओं के साथ उनके पति के सामने ही सामूहिक दुष्कर्म किया था। एक महिला गर्भवती थी। उसने बदमाशों ने रहम की भीख भी मांगी थी लेकिन नशे में धुत लुटेरों ने उसके साथ भी हैवानियत दिखाई थी। घटना के बाद पुलिस अधिकारियों ने तमाम दावे किए थे। पांच पुलिस टीमें लगाई गई थीं। लुटेरों के स्केच भी जारी हुए लेकिन उनकी अब तक पहचान नही हो पाई थी।

पुलिस की असफलता देख पीड़ित परिवार के सदस्यों का भी भरोसा खतम हो गया था और वे यहां से पलायन कर यूपी के बुलंदशहर स्थित अपने पुराने ठिकाने पर चले गए थे। यहां तक कि अन्य कर्मचारियों ने भी खौफ के मारे काम छोड़ दिया जिसके चलते फैक्ट्री में ताला लग गया। इस वारदात के एक माह बाद ही बदमाशों ने फरुखनगर के गांव खंडेवला में खेतों में मकान बनाकर गांव सिकेड़ा थाना पिलखुआ गाजियाबाद यूपी निवासी साठ वर्षीय प्रहलाद के परिवार के साथ लूटपाट हथियार के बल पर की थी। प्रहलाद खेत ठेके पर खेत लेकर खेती कर रहा था।