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गो उपचार केंद्र में कराया गया गोदान

शहर के नया गाव रोड स्थित गो उपचार केंद्र में शुक्रवार को गोदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गोधन सेवा समिति के इस कार्यक्रम में हरिद्वार से पधारे डॉ. स्वामी दिव्यानंद भिक्षु ने विधि-विधान से गोदान संपन्न करवाया। इस अवसर पर स्वामी दिव्यानंद ने कहा कि गोदान से बड़ा दान कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि आज गोवंश अत्यंत ही दयनीय स्थिति में जीने को विवश है। हमें मानव शक्ति, यंत्र शक्ति व गो शक्ति के संतुलन का पूरा ध्यान रखना होगा अन्यथा धरती के विनाश को नहीं रोका जा सकता। गाय एक चलता फिरता चिकित्सालय है। जो रोग दवाओं से ठीक नहीं होते है, उनका इलाज पंचगव्य से संभव है। हमें गो पालन की अवधारणा का प्रचार-प्रसार करना होगा। उन्होंने कहा कि गोपालन व गो उत्पादों के प्रयोग से ही गोवंश की रक्षा व सम्मान किया जा सकता है। आज इस संसार में सबसे बड़ी समस्या है आसुरी स्वभाव। इसी आसुरी स्वभाव के कारण पूरी दुनिया आतंकित है। यह आतंकवाद इसी स्वभाव की देन है। आसुर का अर्थ है वे लोग जिनका आचरण अपवित्र है, जो अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए अन्याय की किसी भी सीमा को पार कर सकते हैं। ऐसे लोगों के स्वभाव को लोकपाल बिल बना कर नहीं अपितु पवित्र दिल बनाकर बदला जा सकता है। पवित्र दिल बनाने के लिए पवित्र आहार चाहिए।