# पाक PM के आरोप पर भारत का पलटवार-टेररिस्तान है पाकिस्तान         # मोदी का वाराणसी दौरा आज, 305 करोड़ से बने ट्रेड सेंटर का करेंगे इनॉगरेशन         # समुद्र में बढ़ेगा भारत का दबदबा, पहली स्कॉर्पिन पनडुब्बी तैयार         # रोहिंग्या विवाद के बीच म्यांमार को सैन्य साजो-सामान दे सकता है भारत         # चीन में सोशल मीडिया पर इस्लाम विरोधी शब्दों के प्रयोग पर लगी रोक         # परवेज मुशर्रफ का दावा-बेनजीर की हत्या के लिए उनके पति जरदारी जिम्मेदार          # भारत ने अफगानिस्तान में 116 सामुदायिक विकास परियोजनाओं की ली जिम्मेदारी         # जम्मू-कश्मीर में दो आतंकी गिरफ्तार, सशस्त्र सीमाबल पर किया था हमला        
News Description
18 वर्षो से मुसीबत का सबब बनी नई अनाज मंडी के साथ लगती झुग्गी झोपड़ी

अम्बाला शहर:-  कहते है कि 13 साल बाद तो भगवान रूढ़ी की भी सुन ली थी, लेकिन शहर के सैक्टर-8 निवासियों के लिए पिछले 18 वर्षो से मुसीबत का सबब बनी नई अनाज मंडी के साथ लगती झुग्गी झोपड़ी बस्ती को हटाने के लिए यहां के लोग सरकारी दफ्तरों और सियासी लीडरों के चक्कर काट-काट कर थक्के चुके है लेकिन किसी ने अभी तक इस नाजायज बस्ती को हटाने के लिए ठोस कदम उठाना गवारा नहीं समझा। प्रशासन की लाहपरवाही और सियासी लीडरों की मूक-सहमति का इन धक्का बस्ती वालों ने जमकर नाजायज फायदा उठाया। देखते ही देखते लोगों ने शहर की नई अनाज मंडी के साथ सैक्टर-8 में हुड्डा की खाली जमीन पर एक पूरी नाजायज झोपड़ पट्टी बस्ती बसा ली। झोपड़ पट्टी वालों ने कुंडियां लगाकर अपनी पूरी कालोनी बिजली से रोशन कर ली, केबल टीवी और डिश एंटीने लग गए, लेकिन प्रशासन के किसी कर्मचारी अथवा आला अधिकारी की जुर्रत नहीं हुई कि वह इस बस्ती की तरफ आंख उठा कर देख सके। प्रदेश के पूर्व मंत्री और शहर विधायक विनोद शर्मा के 10 वर्षों के कार्याकाल के दौरान तो इन झुग्गी झोपड़ी वालों की मौजें ही हो गई जब लोगों के राशन कार्ड और वोटर कार्ड बनाकर इस नाजायज बस्ती को नई बस्ती का नाम दे दिया गया। रही सही कसर उस समय की केन्द्रीय मंत्री ;मौजूदा राज्य सभा मैंबरद्ध कु. सैलजा ने पूरी कर दी जिन्होंने इस नाजायज बस्ती के लोगों की सहुलियत के लिए यहां मोबाइल टायॅलट का इंतजाम कर दिया। हुड्डा के सैक्टर-8 में मंहगे दामों पर प्लाट लेकर घर बनाने वाले सैक्टर वासियों ने गंदगी और सुरक्षा का हवाला देकर कई बार प्रशासन से इन झुग्गियों को हटाने की गुहार लगाई लेकिन किसी ने उनकी नहंीं सुनी। कई वर्षो तक अम्बाला में उपायुक्त के पद पर रहे समीर पाल सरो और मनदीप बराड़ उनके पास ज्ञापन लेकर आने वाले सैक्टर वासियों को लॉलीपाप देते रहे कि कुछ दिनों में ही झुग्गियां हटा दी जाएगी लेकिन वोटों की राजनीति के चलते झुग्गियां नहीं हटाई गई। बिजली महकमे वालों ने कई बार पुलिस बल के साथ मिलकर इस नाजायज बस्ती में चल रहे कुंडी कनैक्शन को हटाने की कोशिश की लेकिन उनके जाते ही यह शातिर लोग दोबारा धडल्ले से बिजली चोरी करते रहे। सरकार द्वारा इन लोगों के लिए छावनी में घर बनाए गए, इन्हें वहां शिफ्ट करने की कई कोशिशें की गई लेकिन बिजली, पानी व अन्य मुफ्त सहुलतों के आदि बन चुके इन झुग्गी झोपड़ी वालों में से कई लोगों ने सरकार द्वारा मिले मकान बेच कर फिर सैक्टर-8 में डेरा जमा लिया। कुछ दिन पहले हुडडा विभाग द्वारा यहां की झुग्गियों पर पोस्टर चिपकाकर लोगों को जगह खाली करने के नोटिस दिए गए लेकिन गुस्साए लोगों ने नोटिस फाड़ कर फैंक दिए और  जगह खाली करने से साफ इंकार कर दिया।  इतना ही नहीं गत दिवस मध्य रात्रि को एसपी अभिषेक जोरवाल के साथ मौके का मुआयना करने पहुंचे उपायुक्त प्रभजोत ंिसंह के आदेशों पर जब झुग्गियों के कुंडी कनैक्शन काटने की कार्यवाही शुरू की गई तो महिलाओं ने बिजली कर्मियों पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। इस बात से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है प्रशासन की लापरवाही और सियासी लीडरों की मूक सहमति के चलते सैक्टर वासियों के लिए जी का जंजाल बन चुकी इस झोपड़ पट्टी बस्ती को खाली करवाना अब इतना आसान नहीं।