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स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया फलोरोसिस नियंत्रण कार्यक्रम

जिले में बढ़ती  फलोरोसिस की समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा फलोरोसिस नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है इस कार्यक्रम के तहत जिले के सभी गांवों से भूमिगत जल के नमुने लिए जा रहे है तथा उनमें फ्लोराईड की मात्रा जांची जा रही है। 

    सिविल सर्जन डा. दयानंद बागडी ने बताया कि पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग ने फ्लोरोसिस टीम द्वारा दौहान पच्चीसी व नांगल चौधरी खंड के लगभग 125 गांवों से पानी के नमुने लिए गए तथा जांच के बाद पाया कि लगभग 70 प्रतिशत नमुनों में फ्लोराईड की मात्रा मानक से अधिक पाई गई।  टीम ने पाया कि लगभग इन सभी गांवों में नहरी वाटर सप्लाई लहरोदा से पानी की सप्लाई दी जा रही है परंतु लोग इस पानी को पीने के रूप में इस्तेमाल नहीं करते बल्कि नहाने एवं कपड़े धोने के लिए काम में लिया जाता है। लोग सोचते है कि यह पानी साफ  व पीने लायक नहीं होता। लोगों कि यह धारणा बिल्कुल गलत है। नहरी पानी ट्रीटमेंट के बाद पीने के लिए पुरी तरह सुरक्षित होता है।

    जिले के भूमिगत जल में फ्लोराईड की मात्रा में लगातार इजाफा हो रहा है। जिससे दांतो व हड्डियों से संबंधित बिमारियां हो रही है जैसे की दांतो का पीलापन, हडिडयों व जोड़ो में दर्द व अकडऩ तथा गर्भवती महिलाओं मे खून की कमी, पुरूषों में नपुसंकता, शरीर में थकान का होना, अपच जैसी अनेक बिमारियां फ्लोराईड की वजह से हो रही हैं।

नोडल अधिकारी डा. धर्मेश कुमार सैनी ने बताया कि पानी मे फ्लोराईड की जांच के लिए स्थानीय सिविल सर्जन लेबोरेट्री कार्यालय में  कोई भी आम आदमी अपने पीने के पानी में फ्लोराईड की जांच निशुल्क करवा सकता है।