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सार्वजनिक क्षेत्र को बचाने के लिए बैंककर्मी हुए एकजुट

अखिल भारतीय बैंक अधिकारी संघ (एआईबीओसी) की प्रदेश यूनिट द्वारा पंजाब नेशनल बैंक, मंडल कार्यालय, कुरुक्षेत्र के सामने सायं प्रदर्शन का आयोजन किया गया। बैंकों के अधिकांश अधिकारियों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया।

प्रांतीय उप-सचिव कामरेड हाकम चौधरी ने बताया की ग्रैचुइटी सीमा केंद्रीय कर्मचरियों के लिए बीस लाख है, लेकिन बैंक कर्मचारियों को अभी तक दस लाख ही मिलते है। बैंक अधिकारियों के पिछले वेतन समझौते के कुछ मामले अभी तक लंबित है। सरकार बैंकों के राष्ट्रीयकृत स्वरूप को खत्म करने पर तुली हुई है। बैंकों को निजी क्षेत्र में बेचने की तैयारी चल रही है। बैंकों के विलय एवं अधिग्रहण की सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। वेतन पुनर्निर्धारण के लिए ये मांग करते है की हमारा वेतन सातवें वेतन आयोग के अनुसार बढ़ाया जाए। 1979 में पिल्ले कमेटी के समय बैंक अधिकारियों के वेतन-मान आईएएस के समकक्ष या ज्यादा थे। आज बैंक अधिकारी सब से कम वेतनमान ले रहे है। राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकारी दिन रात काम करते है और गरीबी उन्मूलन योजनाओं में हमारा योगदान सर्वविदित है। आज का दिन सार्वजनिक क्षेत्र बचाओ दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का 31 मई 2017 को एनपीए 13 लाख करोड़ के स्तर को पार कर गया है। बैंक अपने बढ़ते हुए बोझ से चरमरा रहे हैं। करीब 20 पब्लिक सेक्टर बैंकों ने जितने लोन दिए हैं उसका 10 फीसदी में बदल गया है। इंडियन ओवरसी•ा बैंक का एनपीए तो 22 प्रतिशत से अधिक हो गया है। 2016 के दिसंबर तक 42 बैंकों का एनपीए 7 लाख 32 हजार करोड़ हो गया । एक साल पहले यह 4 लाख 51 हजार करोड़ था। इसमें से 6 लाख करोड़ का एपीए पब्लिक सेक्टर बैंकों का था।