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सरकार की पारदर्शिता की नीति को ठेंगा दिखा रहे अधिकारी |

जहां केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार काम में पारदर्शिता लाने के लिए प्रयास कर रही हैं, वहीं अधिकारी इसे ठेंगा दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। अपने लोगों को फायदा दिलाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। इसके चलते लोगों में सरकार की छवि खराब हो रही है। ताजा मामला जिला खाद्य नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता मामले नियंत्रक कार्यालय का सामने आया है, जिसमें चतुर्थ श्रेणी के दो कर्मचारियों की नियुक्ति में अपने लोगों को भर्ती करने के लिए विज्ञापन ऐसे अखबार में दिया गया, जिसकी नाममात्र की प्रतियां ही जिले में पहुंचती हैं। नियुक्ति के बाद जब मामले ने तूल पकड़ा तो बृहस्पतिवार को आनन-फानन में दोनों कर्मचारियों को हटा दिया गया।

डीएफएससी कार्यालय द्वारा गत 4 जनवरी को एक दैनिक अखबार में दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया। आवेदन 20 जनवरी तक मांगे गए थे। लेकिन अपने लोगों को नियुक्त करने की नीयत से कुछ समय बाद बिना कोई कारण बताए इसे रद कर दिया गया। एक बार फिर 27 मार्च को एक ऐसे अखबार में विज्ञापन दिया गया, जिसकी जिला में नाममात्र की प्रतियां आती हैं। ऐसा इसलिए किया गया ताकि इन रिक्तियों के बारे में कम से कम लोगों को जानकारी मिले। इसके बाद भी उक्त अखबार की उस दिन की सभी प्रतियां सुबह ही स्टाल से ही खरीद ली गईं, ताकि अन्य लोगों तक रिक्तियों की सूचना पहुंच ही नहीं पाए।

नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए डीएफएससी संजीत राणा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई, जिसमें कार्यालय के अधीक्षक किशन कुमार और अकाउंटेंट रविंद्र कुमार को शामिल किया गया। कमेटी ने इन पदों के लिए वेदप्रकाश और अरुण कुमार का चयन कर लिया। यह नियुक्तियां इतने गुपचुप तरीके से की गईं कि विभाग के अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को भी भनक तक नहीं लगी। दोनों कर्मचारियों को गत 18 अप्रैल को ज्वाइन भी करवा दिया गया, लेकिन जब इस नियुक्ति पर सवाल उठने लगे तो बृहस्पतिवार सायं आनन-फानन में दोनों कर्मचारियों को हटा दिया गया। गौर हो कि राशन वितरण में भी विभागीय अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के मामले लगते रहे हैं।

मामले की जानकारी मिलने पर भाजपा के कई पदाधिकारी भी खासे नाराज हैं और उन्होंने मामला उच्च स्तर पर उठाने का फैसला किया है। इस संबंध में डीएफएससी संजीत राणा से संपर्क करने का कई बार प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने मोबाइल फोन रिसीव नहीं किया। विभाग में अधीक्षक पद पर कार्यरत किशन कुमार ने संपर्क करने पर बताया कि दोनों कर्मचारियों को आज हटा दिया गया है। हटाने का कारण तो उन्होंने नहीं बताया, लेकिन कहा कि डीएफएससी ने फोन पर दोनों कर्मचारियों को हटाने के आदेश दिए थे, उसी आधार पर कर्मियों को हटाया गया। उन्होंने बताया कि नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी थी और सभी नियमों का पालन किया गया था।

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