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कंट्रोल रूम तो बनाया लेकिन कॉल करने पर नहीं मिला रहा रिस्पॉन्स

मामूली बारिश के बाद भी शहर में सड़कों पर कई फीट जलभराव होने से बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। पॉश इलाकों से लेकर निचले क्षेत्रों तक लोगों के घरों और दुकानों में भी पानी भर जाता है। ऐसे में घर के सामान को डूबने से बचाने के लिए लोगों को पानी में पसीना बहाना पड़ता है। मानसून सीजन में लगातार दो-दिन बारिश होने पर हालात और बिगड़ सकते हैं।

प्रशासन ने फ्लड कंट्रोल रूम भी बनाया है। जो 24 घंटे सातों दिन काम करेगा। इसके लिए एक कर्मचारी तैनात किया है। बाढ़ जैसे हालात बनने पर मदद के लिए कोई भी फोन नंबर 01662- 2-31137 पर कॉल कर सकता है। शहर में पिछले 29 जून को सुबह से दोपहर तक बारिश हुई तो लोगों ने कंट्रोल रूम के नंबर पर शिकायतें भी की। यही नहीं रात के समय बारिश होने पर भी शिकायतें आईं। मगर मदद शायद ही किसी के पास पहुंची हो। हर बार की तरह पानी खुद ही दो या तीन दिन में निकल गया या लोगों ने अपने प्रयासों से निकासी के प्रबंध किए।हुडा और नगर निगम के क्षेत्रों में प्लानिंग के समय ड्रेनेज सिस्टम कई वर्ष पहले बनाया गया था, मगर तकनीकी रूप से खामियों के कारण यह सफल नहीं है।
 
किसे कहते हैं अर्बन फ्लडिंग
नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की गाइडलाइन के अनुसार ग्रामीण बाढ़ से अलग शहरी बाढ़ होती है। खुले क्षेत्रों में बाढ़ आने की कम संभावना रहती है, जबकि शहरी क्षेत्रों में आबादी अधिक होने से क्षेत्र की डेंसिटी कम हो जाती है। पिछले कई वर्षों से आबादी बढ़ी है। ऐसे में पानी भरने पर शहर में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। जहां कम पानी होने पर माल का नुकसान और संक्रमण फैलने के खतरे से जान पर भी बन आती है। शहरी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों का केंद्र है। इसलिए प्रशासन की 24 घंटे 7 दिन तक ऐसे हालात न बनने दिए जाएं इसकी जिम्मेदारी रहती है। एनडीएम ने इस स्थिति काे आपदा माना है।
 
शिकायत का समाधान नहीं
सन 1991 से हुडा के दफ्तर जा जाकर थक चुका हूं। सैकड़ों शिकायतें भी कर चुका हूं। बारिश जब भी आती है अर्बन एस्टेट के घरों में पानी चला जाता है। लोगों की गाड़ियों को नुकसान न पहुंचे इसके लिए हम गेट भी बंद करा देते हैं। बारिश आने पर बाढ़ से भी बदतर हालात होते हैं।