News Description
सरकार के आदेश के बाद प्रशासन की ओर से सुविधा नहीं, कांवड़ियों में रोष

नूंह:प्रदेश सरकार के सख्त आदेश के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा दी जा रही सुविधाओं से कांवड़ यात्री संतुष्ट नहीं है। कांवड़ यात्रियों के लिए शौचालय से लेकर सुरक्षा, चिकित्सा, सीसीटीवी कैमरे व पेयजल जैसी सुविधाओं का भारी अभाव है। अमरनाथ यात्रा के दौरान जम्मू-कश्मीर में तीर्थ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले के बाद प्रदेश सरकार के सामने कांवड़ यात्रियों को सुरक्षा प्रदान करना बड़ी चुनौती है।

    मेवात जिले की सीमा रोजकामेव से लेकर अंतिम सीमा मुंडाका बार्डर तक लगभग 80 किमी दिल्ली-अलवर मार्ग पर निजी 40 कांवड़ विश्राम कैंप बनाए गए हैं। कांवड़िये हर कैंप में आराम करते हैं। मेवात से गुजरने वाले कांवड़ियाें के लिए सीएम मनोहर लाल ने विशेष आदेश कर जिला प्रशासन को कहा था कि कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा से लेकर शौचालय तक की सभी सुविधाएं जिला प्रशासन की ओर से प्रदान की जाए। लेकिन जिला उपायुक्त द्वारा पूरे जिले को ओडीएफ बनाने के बाद भी कांवड़ियों को मजबूरी में खुले में शौच करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

  कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले डीसी मनीराम शर्मा ने बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन प्रशासन सुविधा देना भूल गया है। अभी तो कांवडिय़ों की नूंह में आने की शुरुआत भर हुई है। इसी में प्रशासन के दावों की पोल खुल गई। लाला घनश्याम दास ने बताया कि वो कई सालों से कांवड़ियों की सेवा कर रहे हैं, लेकिन शासन व प्रशासन की लापरवाही से कांवड़ियों के साथ हम भी असंतुष्ट हं। हम तो हर सुविधा देने की कोशिश कर रहे हैं। डीसी के वादे पूरे नहीं हुए हैं।