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देश की पहली सौर ऊर्जा से संचालित और बैटरी बैंक की सुविधा से युक्त 1600 एचपी डीईमयू यात्री रेल गाड़ी स

.बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल और नर्सिंग होम में में किराए पर कैंटीन और मेडिकल शॉप देने वाले डॉक्टर्स को भी जीएसटी भरना होगा। प्रदेश के 3500 से ज्यादा अस्पतालों में ऐसी कैँटीन और मेडिकल शॉप चल रही हैं, जिनका किराया एक लाख से 5 लाख रुपए प्रतिमाह तक है। ऐसे अस्पताल संचालकों को जीएसटी नंबर ही नहीं लेगा होगा बल्कि सरकार को टैक्स भी देना होगा। यह नियम उन्हीं अस्पतालों पर लागू होगा जिनके यहां संचालित दुकानों को सालाना 20 लाख रुपये से अधिक का किराया मिल रहा है। अगर कैंटीन और मेडिकल हॉल मिलाकर भी वर्षभर में किराया 20 लाख से अधिक है तब पर भी आप पर जीएसटी लगेगा।हिसार सहित प्रदेश के 21 जिलों में 3500 से अधिक प्राइवेट अस्पताल हैं। अमूमन अस्पतालों में 3 से 4 मेडिकल हॉल कैंटीन संचालित होती हैं। यहां दुकानदार 2 लाख या कई अस्पतालों में तो महीने का 5-5 लाख रुपये तक किराया भरते हैं। चूंकि अस्पताल के संचालक डॉक्टर्स होते हैं ऐसे में वे अस्पताल की दुकानों पर किराया लेने के लिए जीएसटी के दायरे में आएंगे। उन्हें जीएसटी नंबर भी लेना होगा और टैक्स भी भरना होगा।