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बदलते मौसम का असर, प्रत्येक 30 मिनट में अस्पताल पहुंच रहा डायरिया का एक मरीज

मौसम बदलते में बढ़ रही बीमारियां बढ़ रही हैं। डायरिया लोगों को खास तौर पर बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। प्रत्येक 30 मिनट में डायरिया का एक मरीज अस्पताल में एडमिट हो रहा है। आलम यह है कि शिशु वार्ड के सभी बैड फुल हो चुके हैं, जिसके चलते मरीजों को मेडिकल वार्ड में एडमिट किया जा रहा है। उधर, जिन एरिया में दूषित पानी की सप्लाई हो रही है उनसे पानी के सैंपल लेने में स्वास्थ्य विभाग ढीली कार्यशैली अपना रहा है। पानी की क्वालिटी में सुधार नहीं होने से मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।

शहर में पेयजल आपूर्ति का जिम्मा पब्लिक हेल्थ, नगर निगम और हुडा के पास है। पेयजल की क्वालिटी को जांचने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। समय-समय पर पानी के सैंपल लेकर इन्हें जांच के लिए लैब में भेजा जाता है। जिन एरिया से पानी की क्वालिटी खराब आती है उन्हें संबंधित विभाग को नोटिस देकर क्वालिटी में सुधार के लिए कहा जाता है। लेकिन विभाग में स्टाफ की कमी अधिकारियों की लापरवाही के कारण पानी की क्वालिटी की जांच नहीं हो रही है। जगह-जगह पानी की लाइन लीक होने से लोगों को दूषित पानी मिल रहा है। इस वजह से लोग डायरिया की चपेट में रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या सर्वाधिक हैं। चिकित्सकों की मानें तो बच्चों की इम्युनिटी कमजोर होने की वजह वो जल्द डायरिया बीमारियों की चपेट में रहे हैं। शिशु रोग विशेषज्ञों की मानें तो प्रत्येक 45 मिनट में ऐसा बच्चा रहा है, जिसकी हालत देखकर उसे एडमिट करना पड़ रहा है। जबकि रोजाना 20 बच्चे ऐसे हैं जिन्हें दवा देकर घर भेजा जा रहा है। इसके अलावा बड़ों में बुजुर्गों को डायरिया की शिकायत रही है। इसमें करीब 40 मरीज डायरिया के शिकार होकर अस्पताल रहे हैं, जिसमें से करीब 20 मरीजों को एडमिट करने की आवश्यकता पड़ रही है।