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अम्बाला लोकसभा क्षेत्र कांग्रेसी दिग्गजों का बना अखाड़ा

आजकल कांग्रेस के दिग्गजों की गतिविधियां अम्बाला लोकसभा क्षेत्र में एकाएक बढ़ गई हैं। कहने को तो कांग्रेसी इसे पार्टी की मजबूती के लिए छेड़ी गई मुहिम बता रहे हैं, लेकिन जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा की ओर से इस लोकसभा क्षेत्र में आगे-पीछे रैली की जा रही हैं उसने सत्ता से 3 साल पहले बेदखल हुए पार्टी के वर्करों की पेशानी पर जरूर बल डाल दिए हैं। अब तो 16 जुलाई को दोनों दिग्गजों की समानांतर रैली ने कार्यकर्ताओ के लिए असमंजस में डाल दिया है। वहीं, ये खींचतान वर्करों को भविष्य के लिए चिंतित कर रही है कि यदि दिग्गजों की जंग अकेले-अकेले यूं ही चली तो फिर वापसी मुश्किल है।

बताते चलें कि कुमारी शैलजा अम्बाला लोकसभा क्षेत्र से 2004 व 2009 में सांसद निर्वाचित हो केंद्र में वजीर रह चुकी हैं। पहले चुनाव तक भूपेंद्र सिंह हुड्डा व शैलजा की जुगलबंदी ने खूब राजनीतिक रंग जमाया लेकिन ज्यों-ज्यों सत्ता का सफर आगे बढ़ा, इन 2 दिग्गजों की राजनीतिक लड़ाई भी बढ़ती गई और इसका खमियाजा अम्बाला को भुगतना पड़ा।कुमारी शैलजा 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गईं, मोदी लहर के चलते जहां पहले लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस की दुर्गति हुई फिर विधानसभा चुनाव में अम्बाला लोकसभा क्षेत्र की सभी 9 विधानसभा हलकों में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला।