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सबसे गंदे शहर में पलवल के बाद बहादुरगढ़ का नाम

स्वच्छतासर्वेक्षण में सफाई के मामले में बहादुरगढ़ का स्थान प्रदेश के अन्य जिलों की लिस्ट में सेकेंड लास्ट आया है। इसे सबसे गंदे शहर के रूप में स्थान पाने वाले शहर पलवल के बाद दूसरा नंबर मिला है। गुरुवार को जारी केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए ताजा सर्वेक्षण में 434 शहरों के सर्वे में बहादुरगढ़ 353 वें स्थान पर रहा। पर वह पलवल शहर की गंदगी में उससे आगे निकल गया जो 397 वें स्थान पर रहा। 

इस सर्वे में इसमें पहले नंबर पर करनाल 65 वें स्थान पर, फरीदाबाद 88 वें स्थान पर, गुरुग्राम 112 वें स्थान पर, पंचकुला 211, सोनीपत 243 वें, थानेसर 253 वें, जींद 265 वें, सिरसा 274 वें, कैथल 282 वें, हिसार 291 वें, रोहतक 295 वें स्थान पर रहा। वहीं रेवाड़ी 303 वें, अंबाला सदर 308 वें, पानीपत 235 वें, भिवानी 345 वें, यमुनानगर 346 वें स्थान पर रहा। बहादुरगढ़ 353 वें स्थान पर रहा सबसे अंत में पलवल 397 वें स्थान पर रहा। स्वच्छता सर्वेक्षण में बहादुरगढ़ को पहली बार शामिल किया गया था। दिसंबर में आई सर्वे टीम ने यहां सफाई व्यवस्था की तैयारियों को जिस तरह से नापा उसे देखते हुए गुरुवार को जारी हुई रिपोर्ट में साफ हो गया कि बहादुरगढ़ प्रदेश के सबसे गंदगी भरे क्षेत्रों में एक है। गुरुवार को जारी लिस्ट में सरकार द्वारा करवाए गए सर्वे में तो यहीं रिपोर्ट दी गई है। 


इसबार का शहर की सफाई को लेकर जो प्लान तैयार किया गया है उसमें हर साल नगर परिषद 11 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसके लिए आठ मई को ठेका छोड़ा जाना है। जो कंपनी ठेका लेगी उसे शहर की मुख्य आठ सड़कों पर वेक्यूम मशीन से सफाई की जिम्मेदारी भी सफाई का ठेका लेने वाली कंपनी के पास होगी। अब सफाई का ठेका लेने वाली कंपनी किराए पर वेक्यूम मशीन लेकर आए या फिर स्वयं अपनी खरीदे यह उसकी जिम्मेदारी होगी। 


बहादुरगढ़स्वच्छता सर्वे लिस्ट में अंतिम स्थानों में आया है पर अब व्यवस्था सुधारी जाएगी। शहर की सफाई व्यवस्था पर बराबर नजर रखी जानी है। जिससे अगली बार स्वच्छता सर्वेक्षण में बहादुरगढ़ का रेंक अच्छा आए। अब इस मामले में उन लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी जो शहर में गंदगी को सड़क या फिर औद्योगिक क्षेत्र नाले आदि में फेंक रहे हैं। ऐसे लोगों के चालान काटने को कहा है। 

नपके सचिव मुकेश कुमार ने बताया कि नगर परिषद की ओर से सफाई कार्य का जो टेंडर किया गया है वह शहर को निर्मल बनाने के लिए किया गया है। नगर परिषद के पास सफाई कर्मचारियों की कमी है और सफाई के ठेके में ठेकेदार द्वारा करीब 300 नए कर्मचारियों को लगाया जाएगा। अगर हिसाब लगाया जाए तो अकेले सफाई कर्मचारियों की तनख्वाह पर ही करीब 25 लाख रुपये की राशि खर्च हो जाएगी। इसके अलावा करीब 20 ट्रैक्टर-ट्राली भी होंगी। वहीं रिक्शा, टाटा ऐस, जेसीबी आदि अन्य संसाधनों की भी व्यवस्था होगी। पूरे शहर के अलावा सेक्टर क्षेत्रों की जिम्मेदारी भी अपने पास है। प्रयास है कि अगले साल के सर्वे से पहले ही शहर में गंदगी को साफ कर इसे निर्मल की श्रेणी में पहुंचाया जा सके। 

226 सफाई कर्मचारी, कूड़ा उठाने की नहीं व्यवस्था 

शहरमें सफाई व्यवस्था के लिए इस समय केवल 226 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। वहीं, कूड़ा उठाने की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण पूरा शहर गंदगी से भरा हुआ है। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शहर में सफाई का काम ठेके पर देने का फैसला किया है। पहलेसाल भर में सफाई में लिफ्टिंग का ठेका दिया जाता था। 


नगर परिषद ने बढ़ाया बजट, अब वैक्यूम मशीन से होगा सफाई का काम, आठ को खुलेगा टेंडर