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RTI का बड़ा खुलासा, सरकार के पास नहीं शहीदों का कोई रिकार्ड

आजादी की लड़ाई लड़ने वालों की बहादुरी की कहानियां युवा वर्ग तक पहुंचे, ताकि उनमें भी देशभक्ति का जज्बा कायम रहे। इसके लिए गृहमंत्रालय संसद में आर.टी.आई. लगाई गई। मगर कहीं से भी आर.टी.आई. का जवाब नहीं मिला।
आर.टी.आई. एक्टिविस्ट व इंकलाब मंदिर के संस्थापक वरयाम सिंह ने बताया कि शहीदों का गुमथला राव में इंकलाबफिलहाल मंदिर में 120 शहीदों का पूर्ण इतिहास फोटो हैं। यहां पर आने वाले लोग और ज्यादा शहीदों के बारे में पूछताछ करते हैं। लोगों की इच्छा शांत करने के लिए उन्होंने पहले तो अपने स्तर पर शहीदों का रिकॉर्ड खंगाला। वे केवल 200 शहीदों का रिकॉर्ड एकत्र कर पाए।
बाद में उन्होंने गृह मंत्रालय से शहीदों के रिकाॅर्ड के लिए आर.टी.आई. लगाई, जिसमें उन्होंने पूछा कि 1857 से 1947 तक देश की आजादी के लिए कितने शहीदों ने प्राणों की आहुति दी। देश में शहीदों के नाम पर कितने बोर्ड, अायोग अमर शहीदों के सम्मान के लिए बनाए गए। लोकसभा व राज्यसभा में अपने प्रार्णों की आहुति देने वाले शहीदों पर कब-कब चर्चा हुई।मंदिर बनाया हुआ है। इस कार्य में 17 साल लग गए। मंदिर में शहीदों की प्रतिमा स्थापित की हुई है। उनकी भगवान की तरह पूजा होती है।