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पोली कल्चर से किसानों का फसलों के विविधिकरण के प्रति दृष्टिकोण बदला है. डा० मदन लाल

जब से पोली कल्चर व्यवस्था शुरू हुई है,तब से किसानों का फसलों के विविधिकरण के  प्रति दृष्टिकोण बदला है और परम्परागत फसल गेहूं व धान के साथ-साथ बागवानी काश्त को अपनाने में रूचि दिखाई है बल्कि जिला में ऐसे करीब 150 से ज्यादा किसानों ने पोली कल्चर व्यवस्था को अपनाया है। पोली कल्चर में बेमौसमी सब्जियां उगाकर छोटी जोत होने के बावजूद भी किसान प्रति एकड़  में ना केवल अत्याधिक उत्पादन ले रहे है बल्कि प्रति एकड़ अपनी आय में भी वृद्धि कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। 

एन.एच.एम. स्कीम में 65 प्रतिशत अनुदान दिया गया,जो अब भी जारी है। इस व्यवस्था के सौजन्य से किसानों ने संरक्षित खेती के अंतर्गत पॉली हाउस/नैट हाउस, वॉक इन टनल, मल्चिंग व लो-टनल को अपने खेतों में स्थापित किये। इस बारे में जानकारी देते हुए जिला बागवानी अधिकारी डा० मदन लाल ने बताया कि उपरोक्त सभी प्रयत्नों के कारण हरियाणा में संरक्षित खेती ने दिन-दोगुनी व रात-चोगुनी उन्नति की ,जिसमें उद्यान विभाग हरियाणा को  सितम्बर 2016 में भारत में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। संरक्षित खेती में जरबेरा, गुलाब व लिलियम के फू ल तथा खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च, फू लगोभी व हरी मिर्च आदि सब्जी उगाकर कुछ किसानों ने प्रति एकड़ लाखों रूपये तक का मुनाफा कमाया। 

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को जैविक ढंग से खेती करनी चाहिए।  जैविक तरीके से खेती करने से उपभोक्ता को जहरीली सब्जियों से मुक्ति मिलेगी। इस दिशा में सरकार और विभाग का बेहतर प्रयास जारी है,लेकिन लक्ष्य अभी अधूरा है। लक्ष्य की शीघ्र प्राप्ति के लिए किसानों को पोली कल्चर व्यवस्था की ओर ध्यान देना होगा।