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सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए एसआइटी का गठन सराहनीय कदम : रघुजीत ¨सह विर्क

 कुरुक्षेत्र : 1984 सिख कत्लेआम के 186 मामलों की फिर से जांच हेतु सुप्रीम कोर्ट की ओर से एसआइटी गठित करने के आदेश का शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अमृतसर ने स्वागत किया है। देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा लिए गए इस निर्णय से सिख विरोधी दंगा पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद बनी है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अमृतसर के वरिष्ठ उपप्रधान रघुजीत ¨सह विर्क ने उच्चतम न्यायालय द्वारा लिए गए इस फैसले का स्वागत करते हुए मांग की कि इस जांच का दायरा बढ़ाया जाए, ताकि दोषी उपद्रवियों का पता लगा कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

वे सब ऑफिस कुरुक्षेत्र में बातचीत कर रहे थे। इससे पहले उनका यहां पहुंचने पर सब ऑफिस स्टाफ ने पुष्पगुच्छ देकर स्वागत भी किया। विर्क ने कहा कि सिख कौम के लिए 1984 सिख नरसंहार एक बड़ा और गहरा जख्म है, जिस पर मरहम लगाना जरुरी है, लेकिन कांग्रेस सरकार ने वोट की राजनीतिक करते हुए जांच कराने का केवल लोक दिखावा किया है। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से गठित एसआईटी ने 1984 सिख विरोधी दंगों के 293 में से 240 मामलों को बंद करना ¨नदाजनक फैसला था। मगर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 186 मामलों की जांच करवाने के लिए एसआइटी गठित करने का आदेश एक साकारात्मक कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त न्यायधीश की अगुवाई में आइपीएस रैंक के मौजूदा व सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों के शामिल होने से मामले की जांच में निष्पक्षता का दायरा भी बढ़ेगा। वरिष्ठ उपप्रधान ने कहा कि शिरोमणि कमेटी शुरु से ही इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग करती आई है और अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा उठाया गया यह साकारात्मक कदम सराहनीय है। थानेसर से एसजीपीसी सदस्य जत्थेदार हरभजन ¨सह मसाना ने कहा कि 1984 सिख कत्लेआम मामलों की नए सिरे से जांच का निर्णय काबिलेतारिफ है। उन्होंने कहा कि तीन दशक से न्याय की बाट जो रहे दंगा पीड़ितों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए इस फैसले से प्रभावित सिखों को इंसाफ मिलने की उम्मीद बंधी है। अलग कमेटी के मुद्दे पर बोलते हुए एसजीपीसी सदस्य ने कहा कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। हालांकि इस मुद्दे को लेकर उन्होंने तत्कालीन भूपेंद्र ¨सह हुड्डा की कांग्रेस सरकार पर निशाना जरुर साधा। उन्होंने कहा कि कुछ स्वार्थी एवं स्वयंभू नेताओं के षड्यंत्र में तत्कालीन मु यमंत्री भूपेंद्र ¨सह हुड्डा ने सिखों को श्री अकाल त त साहिब से तोड़ने का काम किया, जिसका खामियाजा उन्हें विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ा। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि जगदीश ¨सह झींडा ने हरियाणा के सिखों को श्री अकाल तख्त साहिब से तोड़ने का प्रयास किया। मगर प्रदेश की सिख संगत ने सित बर 2011 में अलग कमेटी समर्थित उम्मीदवारों को नकार कर श्री अकाल त त साहिब के प्रति अपनी आस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण दिया था। इस मौके पर ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी के मैनेजर अम¨रदर ¨सह सहित अन्य मौजूद रहे।