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पूर्व पार्षद के जज्बे को सलाम, लोगों ने छोड़े तो चाय के कप उठाकर खुद डस्टबिन में डाले

करनाल बृहस्पतिवार को दैनिक जागरण ने गुरु नानक खालसा कॉलेज के हॉल में सेमिनार आयोजित किया। करीब दो घंटे मंथन चला कि इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में हमारी भूमिका क्या रहेगी? कई वक्ताओं ने जोशिले भाषण देकर जोश बढ़ाया। हॉल में मौजूद गणमान्य लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन किया। इस पूरे कार्यक्रम को पूर्व पार्षद भगवान दास अग्घी भी बड़ी ही संजीदगी से देख रहे थे। वह माइक पर तो नहीं बोले पर जो किया वह मिसाल बन गया। यह देखकर हर किसी ने उनके जज्बे को सलाम किया। दरअसल, पूर्व पार्षद ने लंबे चौड़े भाषण की बजाए स्वच्छता में अपनी भूमिका का नमूना कार्यक्रम में ही पेश कर दिया। दरअसल, चाय पीने के बाद हॉल में मौजूद कुछ लोगों ने कुर्सी के साथ ही चाय के डिस्पोजल कप रख दिए। पार्षदों के साथ बैठे भगवान दास अग्घी यह सब देख रहे थे। एक तो वृद्धावस्था और ऊपर से टांग में दिक्कत के कारण चलने फिरने में परेशानी होती है। बावजूद इसके वह उठे और लोगों के झूठे चाय के कप उठाने लगे। युवाओं ने उन्हें रोका, लेकिन वह नहीं माने। सभी कप उठाए और डस्टबिन में भी खुद डालकर आए। यह देखकर कुछ युवाओं ने भी हाथ बंटाया। वह बिना कुछ कहे संदेश दे गए कि आज से ही स्वच्छता में अपनी भूमिका तय करें। पूर्व पार्षद भगवान दास अग्घी के इस जज्बे को दैनिक जागरण का सलाम।

ऐसे प्रयासों से ही हमारा शहर बनेगा अव्वल

पूर्व पार्षद भगवान दास अग्घी जैसा जज्बा यदि हर कोई दिखाए तो हमारा शहर स्वच्छ सर्वेक्षण में अव्वल जरूर आएगा। उम्रदराज और शहर के मौजिज होने के बावजूद उन्होंने संकोच नहीं किया। सफाई से समझौता करने की बजाय अपने प्रयास से हर किसी को नई राह दिखा गए। हमें भी संकल्प लेना होना होगा कि कचरे को ऐसे छोड़ेंगे नहीं, बल्कि उसे डस्टबिन में डालेंगे।

इंदौर के नागरिकों से सीखें

स्वच्छ सर्वेक्षण-2017 में 65वां स्थान आज भी गौरवांवित करता है। उत्तर भारत में सबसे आगे होने का एहसास ही अजीब सा सुकून देता है। लेकिन यह आखिरी पड़ाव नहीं है। हमें 2017 के सर्वेक्षण के विजेताओं से सीखना चाहिए। देश के सभी शहरों को पछाड़ते हुए इंदौर सफाई में सबसे आगे था। दूसरा स्थान भोपाल को मिला था। हैरानी की बात यह है कि इस परीक्षा में भोपाल के नंबर कम नहीं थे। लेकिन केंद्रीय मंत्रालय की टीम ने स्वच्छता में इंदौर के नागरिकों की सहभागिता देखी तो दंग रह गई। इंदौर वासियों के बलबूते ही ताज उन्हें मिला। कुछ ऐसा ही जज्बा करनाल के लोगों में इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में दिखना चाहिए। भगवान दास अग्घी ने इसका नमूना दिखाया भी है।

सफाई में संकोच कैसा?

जब सेक्टर-7 के पार्क की सफाई के लिए उप निगम आयुक्त रोहताश बिश्नोई और ईओ धीरज कुमार पॉलिथिन उठा सकते हैं तो हम क्यों नहीं? अब जबकि कुछ ही दिनों में सर्वे के लिए केंद्रीय मंत्रालय की टीम हमारे शहर में आने वाली है। तो हमारा भी दायित्व बनता है कि अपने शहर को स्वच्छ बनाए रखें। अब बात अपने शहर के ताज की है। इसलिए आइए एकजुट हो जाएं।