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स्वच्छ सर्वेक्षण को त्वज्जो नहीं दे रहे भाजपा नेता और पार्षद

 हिसार : जैसे-जैसे शहर में स्वच्छ सर्वेक्षण का समय निकट आ रहा है, वैसे ही शहर में स्वच्छता के नाम पर चल रहे 'खेल' की आए दिन कलई खुलती नजर आ रही है। हालात ये हैं कि शहर में स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर चल रहे अभियान में निगम की सफाई शाखा के साथ-साथ कुछ चु¨नदा अधिकारियों को छोड़ दें तो किसी को अभियान से कोई सरोकार नहीं दिख रहा है। जब जनप्रतिनिधि ही शहर से जुड़े मुद्दों से दूरी बना लें तो स्थिति और भी विकट हो जाती है। कुछ ऐसा ही रवैया भाजपा नेताओं और पार्षदों का देखने को मिल रहा है। आजाद नगर में भाजपा किसान मोर्चा और पार्षद कार्यालय के सामने बने कम्युनिटी शौचालय के हालात बद से बदतर हैं। यह एक मात्र एक ही वार्ड की कहानी नहीं है। शूरसेन पार्क और धर्मशाला के सामने शौचालय में कहीं ताले लटक रहे हैं तो कहीं शौचालय के खस्ताहाल हैं।

शहर के पार्कों में धौलपुर पत्थर की परत चढ़ाने वाले निगम अधिकारियों के शौचालयों के हालात भी खराब हैं। जबकि शौचालयों को बेहतर बनाने के लिए पिछले एक साल से नगर निगम के अधिकारी लगे हुए हैं। हालांकि नगर निगम आयुक्त स्वयं यह मानते हैं कि शौचालयों की टूंटियां आदि चोरी हो जाती हैं। लेकिन लाखों रुपये खर्च किए जाने के बाद भी अगर शौचालय बदतर हैं तो यह स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान की राह में भी रोड़ा बन सकता है। नागोरी गेट चौक पर पुरुष शौचालय के नाम पर व्यापारियों ने ही यूरिनल बनाया हुआ है। जबकि वहां सालों पहले बनाए गए शौचालय पर कब्जा किया हुआ है। जहां पर मौजूदा समय में दुकान चल रही है। कई बार नागोरी गेट पर कम्युनिटी शौचालय बनाने की मांग उठ चुकी है। व्यापारियों की मांग है कि सालों पहले जहां कम्युनिटी शौचालय था, वहीं शौचालय का निर्माण किया जाएगा। महिलाओं के लिए विशेष रूप से शौचालय नागोरी गेट पर बनाया जाएगा। क्योंकि यहां पर हजारों की संख्या में रोजाना ग्रामीणों और शहरवासियों का आना जाना है। इसलिए नागोरी गेट पर निगम के शौचालय की जगह बनी दुकान को हटाकर वहां पर शौचालय बनाया जाए।

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शौचालयों पर नहीं लिखे स्वच्छता संदेश

स्वच्छ सर्वेक्षण में शौचालय पर वाल पें¨टग, पोस्टर और होर्डिंग लगे होने चाहिए थे। शहर के कम्युनिटी शौचालयों में ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है। बस स्टैंड से लेकर कैंप चौक तक निगम ने संस्थाओं की मदद से होर्डिंग लगवाए है। परंतु यह शौचालयों पर नहीं चौक चोराहों पर नजर आते है। शौचालयों से स्वच्छता का कोई संदेश नहीं मिलता है। यहीं हालात रहे तो 150 अंक निगम के खाते से कट जाएंगे।