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सत्संग: कृष्ण भक्ति के भजनों पर झूमे श्रद्धालु

सोहना: अनाज मंडी स्थित प्राचीन हनुमान बगीची मैदान में आयोजित कार्यक्रम में कृष्ण भक्ति के भजनों पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे। इस मौके पर कथावाचक विनीता नानी बाई ने राधा-कृष्ण महिमा को रो मायरो यानी नरसी का भात प्रसंग सुनाया। भगत नरसी मेहता अंजाब नगर में जब भात भरने के लिए टूटी गाड़ी और बूढे़ बैलों पर सवार होकर अपने साथी सूरदासों के साथ पहुंचे तो नानी बाई के ससुरालियों ने भात भरने आए नरसी भगत व उनके साथियों को खाली हाथ देख उसी तर्ज पर चलते हुए वर्षो से बंद पड़ी एक टूटी, फूटी दुकान में ठहराया।

ठहराव स्थल पर पीने का पानी भी उपलब्ध ना देखकर सूरदासों ने नरसी भगत से शिकायत लगाई कि आप हमें ऐसी जगह पर लाए हैं। यहां पर हमें कोई पानी पिलाने वाला तक मौजूद नहीं है और ना ही पानी की कोई व्यवस्था की हुई है। तब नरसी भगत ने सूरदासों को अपनी गरीबी का वास्ता देते हुए कहा कि हम गरीब लोग हैं तो हमारा सत्कार भी ऐसा ही होगा। इतना कहकर नरसी भगत रो पडे़ और भगवान श्रीकृष्ण को याद करने लगे। तब अपने भगत की पुकार सुनकर भगवान श्रीकृष्ण पर रहा नहीं गया और अर्ध रात्रि में ही भगवान श्रीकृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा, रुकमणी के साथ महल से निकले और रात में ही बाजार खुलवाकर 56 करोड़ रुपये का हीरे, जवाहरात, पन्ना, सोने की गिन्नी, तरह-तरह की मिठाई आदि सामान खरीदकर भात भरने के लिए गाड़ियों में लदवाया और रात में ही अंजाब नगर पहुंच गए। अगले दिन भगवान श्रीकृष्ण अपनी अर्धागिनी सत्यभामा, रुकमणी और अपने भगत नरसी के साथ उनकी बेटी नानी बाई के घर भात भरने पहुंच गए।